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आर चेतनक्रांति की कविताएं: ‘नौकर’ और ‘हम क्रांतिकारी नहीं थे’

R Chetankranti Poem: न्यूज18 हिंदी के इस स्पेशल पॉडकास्ट में आपका स्वागत है. स्वीकार करें पूजा प्रसाद का नमस्कार. मित्रों, आज हम मुलाकात करेंगे आर चेतनक्रांति की कुछ कविताओं से. इनकी कविताओं से गुजरते हुए कुछ बातें ऐसी हैं, जिनसे अनायास ही धूमिल की याद आ जाती है. हालांकि, आर चेतनक्रांति जब 7 साल के रहे होंगे, तब धूमिल हम सब से विदा ले चुके थे. आर चेतनक्रांति की पैदाइश का वर्ष है 1968, जबकि सुदामा पांडे धूमिल का जीवन 1936 में शुरू हुआ था और 1975 में उनकी सांसें थम गई थीं. धूमिल की एक लंबी कविता है ‘मोचीराम’. जिसकी शुरुआत कुछ यूं है…

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राँपी से उठी हुई आँखों ने मुझे
क्षण-भर टटोला
और फिर
जैसे पतियाये हुये स्वर में
वह हँसते हुये बोला-
बाबूजी सच कहूँ – मेरी निगाह में
न कोई छोटा है
न कोई बड़ा है
मेरे लिये, हर आदमी एक जोड़ी जूता है
जो मेरे सामने
मरम्मत के लिये खड़ा है

तो धूमिल की कविताओं में आदमी को देखे जाने की जो दृष्टि हमें सुलभ होती है. वैसी ही नायाब दृष्टि हमें आर चेतनक्रांति की कविताओं में भी मिलती है. धूमिल की कविताएं अक्सर लंबी हुआ करती थीं, आर चेतनक्रांति की कविताएं भी अमूमन लंबी हुआ करती हैं. आर चेतन की एक कविता है नौकर. इस कविता से गुजरते हुए देह में एक सिहरन पैदा हो जाती है. आदमी-आदमी में जो फर्क उसकी हैसियत से पैदा होता है, वर्गों की जो तीखी खाई पैदा होती है, उसकी जो सड़ांध समाज में पसरती रहती है – इन सभी लक्षणों को बेहद सपाट लेकिन सटीक लहजे में आर चेतनक्रांति रख जाते हैं. सुनें आर चेतन की कविता – नौकर

बुद्धिमानों का चुटकला
उद्यमियों की मशीन
महत्त्वाकांक्षियों की सीढ़ी
भगवान का भक्त
सार्वजनिक स्थानों का आदिवासी
-यह एक क्लर्क है या लेखाकार है या प्रूफरीडर है
या मशीनमैन है या मालिक का निजी सचिव
पद से क्या फर्क पड़ता है और क्या फर्क पड़ता है नाम से
सुबह जब उसी एक रंग से चेहरा पोतकर
वे शहर की सड़कों पर निकलते हैं
और शाम को दफ्तर की सीढ़ियाँ उतरते वक्त
जब उन्हें उनके चेहरे वापस दिए जाते हैं
वे एक ही जैसे होते हैं… (पूरी कविता पॉडकास्ट में)​

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सुदामा पांडेय धूमिल यूपी के वाराणसी जिले के खेवली में जन्मे थे. आर चेतनक्रांति भी मूलत: यूपी के ही हैं. आर चेतनक्रांति का जन्म सहारनपुर जिले के उमरी कलां गाँव में हुआ था. इनकी कविताओं का पहला संग्रह ‘शोकनाच’ 2004 में लोगों के सामने आया. बाद के दिनों में भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार से भी वे नवाजे गए, भोपाल का‘स्पन्दन पुरस्कार’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ व ‘अमर उजाला’ के वार्षिक पुरस्कार भी इन्हें मिले. सच है कि पुरस्कारों का मिलना किसी कवि की ऊंचाई का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता. आर चेतनक्रांति की कविताएं बोलती हुई कविताएं हैं – यह बात उन्हें पढ़कर ही जाना जा सकता है. अपनी कविताओं में आर चेतनक्रांति समाज की परतें उघाड़ देते हैं, मन के द्वंद्व को जिस गहराई में जाकर पकड़ते हैं, वह अद्भुत है. इस द्वंद्व की आत्मस्वीकृति से जब कविता फूटती है तो वह कभी ‘सीलमपुर की लड़कियां’ बन जाती हैं तो कभी ‘हम क्रांतिकारी नहीं थे’. क्रांतिकारी होना और अस्थिर होने के बीच के फर्क से निकलती यह कविता सोचने का विस्तृत दायरा देती है, तो आइए सुने आर चेतनक्रांति की कविता ‘हम क्रांतिकारी नही थे’.

हम क्रांतिकारी नहीं थे
हम सिर्फ अस्थिर थे
और इस अस्थिरता में कई बार
कुछ नाजुक मौक़ों पर
जो हमें कहीं से कहीं पहुंचा सकते थे
अराजक हो जाते थे
लोग जो क्रांति के बारे में किताबें पढ़ते रहते थे
हमें क्रांतिकारी मान लेते थे
जबकि हम क्रांतिकारी नहीं थे
हम सिर्फ अस्थिर थे… (पूरी कविता पॉडकास्ट में)

आम आदमी की टीस को स्वर देने वाली आर चेतनक्रांति की इसी कविता के साथ आज के पॉडकास्ट में हम आपसे विदा की इजाजत चाहते हैं. अगले पॉडकास्ट में फिर किसी नए रचनाकार के साथ मुलाकात होगी, तब तक के लिए पूजा को दें विदा. नमस्कार

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