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किस तरह एयर पॉल्यूशन आपके फेफड़ों को करता है प्रभावित, जानें खास बातें

हाइलाइट्स

एयर पॉल्यूशन के कारण लंग कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है.एयर पॉल्यूशन बच्चों में अस्थमा और सीओपीडी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. उम्रदराज लोगों और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रदूषित हव घातक साबित होती है.

Impact of Air Pollution on Lungs : पर्यावरण व्यक्ति के स्वास्थ्य से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से जुड़ा हुआ है. अच्छा या प्रदूषण रहित पर्यावरण ना केवल नेचर और धरती के लिए बल्कि यहां रहने वाले सभी जानवरों और इंसानों के लिए भी बेहद ज़रूरी है, इसके बाद भी एयर पॉल्यूशन, वॉटर पॉल्यूशन और नॉइस पॉल्यूशन आजकल पर्यावरण का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. आज दुनिया के सबसे बड़े और विकसित देश हों या छोटे और विकासशील देश हर जगह पॉल्यूशन आम हो गया है. प्रदूषण के ढेरों टाइप्स में सबसे ऊपर नाम आता है एयर पॉल्यूशन का जो व्यक्ति को बुरी तरह से बीमार करने की ताकत रखता है. इसका सबसे बुरा असर फेफड़ों पर पड़ता है, इसके अलावा आंखें, स्किन और दूसरे बॉडी पार्ट्स भी एयर पॉल्यूशन के बुरे प्रभाव से जूझते हैं. आइए जानते हैं, फेफड़ों पर एयर पॉल्यूशन का कैसे और कितना प्रभाव पड़ता है.

फेफड़ों पर एयर पॉल्यूशन के प्रभाव 
ओनली माय हेल्थ डॉट कॉम के अनुसार एयर पॉल्यूशन मतलब एयर की क्वॉलिटी खराब हो जाना, पॉल्यूटेड एयर में नाइट्रोजन ऑक्साइड और एसओ2 मौजूद होता है, जो लंग कैंसर जैसी समस्या का कारण बन सकता है. गाड़ियों और फैक्ट्रीज का धुआं इस पॉल्यूशन को बढ़ाता है और साथ ही इस बीमारी के खतरे को भी.

– बच्चों में एयर पॉल्यूशन की समस्या बड़ी बन सकती है. बचपन से प्रदूषण में रहें बच्चे हों या कभी कभी प्रदूषित हवा में आने वाले बच्चे, सभी में सांस से जुड़ी परेशानियां जैसे अस्थमा, निमोनिया, लंग इरिटेशन और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) होने का खतरा रहता है.
– प्रेग्नेंसी के दौरान एयर पॉल्यूशन महिलाओं और उनके बच्चों के लिए घातक हो सकता है. इससे बच्चे की डिलीवरी समय से पहले होने की संभावना रहती है, बच्चा कमज़ोर हो सकता है और बचपन से ही अस्थमा का शिकार भी.
– एक्सपर्ट्स की मानें तो एयर पॉल्यूशन के कारण नॉन एलर्जी राइनाइटिस, साइनसाइटिस, नाक में खुजली, सांस लेने में तकलीफ़ और बार-बार छींक आने जैसी कई छोटी बड़ी समस्याएं होती हैं.
– उम्रदराज लोगों में एयर पॉल्यूशन अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी का कारण बन सकता है. बढ़ती उम्र के साथ इम्युनिटी कमज़ोर पड़ जाती है और बॉडी भी उतने अच्छे से काम नहीं कर पाती, ऐसे में प्रदूषित हवा में सांस लेना बड़ी परेशानी बन सकता है.

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Tags: Health, Lifestyle

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