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क्या आप भी हेयर ट्रांसप्लांट की बना रहे हैं योजना? तो यहां जान लें इसके सभी फायदे और नुकसान

Pros and Cons of Hair Transplantation: बदलते वातारण, हमारी जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान की वजह से कई ऐसी बीमारियां तेजी से सामने आने लगी हैं जो पहले कुछ ही लोगों में देखने को मिलती थी. ऐसी ही एक बीमारी है कम उम्र में बालों का झड़ जाना या फिर गंजे हो जाना. सुंदर चेहरे में बालों का बहुत अधिक योगदान होता है. बालों के झड़ने की समस्या अब आम हो गई है. कम उम्र में बाल झड़ने और गंजापन आने से लोगों में आत्मविश्वास की कमी भी होने लगती है और वे समाज में कटे कटे से रहने लगते हैं.

बाल झड़ने की समस्या ने बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक को परेशान कर रखा है. गंजापन आते ही लोगों का ध्यान हेयर ट्रांसप्लांट की तरफ जाने लगता है. यह एक प्रकार की सर्जिकल प्रोसेस है जिसमें ट्रांसप्लांट कराने वाले शख्स के ही बाल गंजेपन वाली जगह पर प्रत्यारोपित किए जाते हैं. इस प्रोसेस में दो से तीन सप्ताह में बाल उगने शुरू हो जाते हैं और करीब 8 महीने में बालों की नेचुरल ग्रोथ शुरू हो जाती है.

ओनली माय हेल्थ के अनुसार गंजेपन को दूर करने के लिए हेयरट्रांसप्लांट सबसे अच्छा विकल्प है. हालांकि इसे कराने से पहले इसके कुछ फायदे और नुकसान को जानना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं इसके बारे में सब-कुछ…

हेयर ट्रांसप्लांट के फायदे
पर्सनालिटी एन्हांसमेंट – यह जगजाहिर है कि लोग अच्छा दिखने के लिए बालों की चाह रखते हैं और यही सबसे बड़ी वजह है कि गंजापन आने पर लोग सबसे पहले हेयर ट्रांसप्लांट कराने की योजना बनाते हैं. बालों के दोबारा आने से व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में कई गुना इजाफा हो जाता है.

99% सफलता दर – हेयर ट्रांसप्लांट खोए हुए बालों को दोबारा पाने का सबसे कारगर उपाय है लेकिन कुछ मिथ के कारण लोग इसे अपनाने से डरते हैं लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो इसकी प्रक्रिया 99% सफलता दर के साथ पॉजिटिव परिणाम की गारंटी देती है. चूंकि यह प्रक्रिया फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (FUT) के माध्यम से बालों को जड़ों में ट्रांसप्लांट करती है इसलिए इसमें बालों के तेज गति से बढ़ने की संभावना अधिक होती है.

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नेचुरल बाल: हेयर ट्रांसप्लांट ही एक ऐसा माध्यम है जिसमें प्राकृतिक रूप से बाल उगाए जाते हैं. इसमें सर्जरी कराने वाला ही डोनर और रिसीवर दोनो है. आपके ही बाल गंजेपन वाली जगह पर लगाए जाते हैं इसलिए बालों की प्राकृतिक रूप से ग्रोथ होती है. गंजेपन को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विग और अन्य समाधानों की अपेक्षा यह अधिक सुविधाजनक माध्यम है.

निरंतर वृद्धि : हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद आपको विग की तरह की समस्या नहीं होती. प्रत्यारोपण के करीब 8 महीने बाद बालों की निरंतर वृद्धि शुरू हो जाती है. नए बाल आपके पूरी लाइफ आपके साथ रहेंगे.

हेयर ट्रांसप्लांट के नुकसान
बेहद महंगा उपाय: हेयर ट्रांसप्लांट काफी महंगा उपचार है और यही सबसे बड़ा कारण है कि लोग इसके कराने से हिचकते हैं. इलाज के दौरान और इलाज के बाद महीनों तक बालों की केयर करने में हाजारों रुपये का खर्ज आ जाता है जिसे वहन करना हर किसी के बस की बात नहीं है.

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बाल उगने में देरी: हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद पूरी तरह से बाल आने में एक से डेढ़ साल का समय लग जाता है. ज्यादातर लोग इतने दिनों तक इंतजार करने को तैयार नहीं होते जिसकी वजह से वह ट्रांसप्लांट की योजना बदल देते हैं.

सामान्य स्थिति में आने में देरी: हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल उपाय है. इसमें सर्जरी के माध्यम से गंजेपन वाली जगह पर बाल लगाए जाते हैं. इस वजह से सर्जरी के बाद रिकवरी में काफी समय लगता है. कई लोगों को सर्जरी के बाद सिर में जलन, दर्द, आंखों में समस्या, सिर में खुजली जैसी दिक्कतें भी होने लगती हैं. ऐसे में धूम में जाने से, गंदगी के संपर्क में आने से खुद को बचाना चाहिए.

निशान पड़ना: कई लोग सिर पर निशान पड़ने के डर से भी हेयर ट्रांसप्लांट कराने से बचते हैं. सर्जरी के दौरान कुछ लोगों के सिर पर निशान पड़ जाते हैं लेकिन यह तब तक दिखाई नहीं देते जब तक आप पूरी तरह से गंजे नहीं होते. हालांकि निशान पड़ने की समस्या सर्जिकल प्रक्रिया पर निर्भर करता है.

संक्रमण का डर: कई लोगों को हेयर ट्रांसप्लांट कराने की वजह से संक्रमण का डर भी सताता है जिसकी वजह से वह अपनी योजना बदल देते हैं. सर्जरी में कई तरह के औजार का प्रयोग किया जाता है इसलिए मामूल संक्रमण होने की संभावना हो सकती है. सर्जरी के बाद आपको ब्लीडिंग हो सकती है और निशान पड़ सकते हैं.

अल्सर होने का खतरा: हेयर ट्रांसप्लांट में दूसरी जगह से बाल निकाले जाते हैं जिसकी वजह से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती है और इसके कारण वहां की स्किन नीचे की तरफ धंस जाती है. इससे अल्सर होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

Tags: Health, Lifestyle

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