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क्या थीं प्राचीन काल में महिलाओं की ब्यूटी ट्रिक्स, गधे के दूध से गुलाब जल तक

हाइलाइट्स

सबसे पहले चेहरे पर मेकअप की शुरुआत प्राचीन मिस्र में हुईआधुनिक कास्मेटिक्स की समूची श्रृंखला ही प्राचीन भारत की देन 1500 साल पहले अष्टांग हृदय नाम से सौंदर्य प्रसाधनों पर किताब लिखी गई

महिलाओं की साज सज्जा और सुंदर लगने की ललक तो प्राचीन काल से ही थी. मिस्र की अभिजात्य वर्ग की महिलाएं सुंदर लगने के लिए सिर पर मुकुट धारण करती थीं. भारत में उबटन लगाने से लेकर दूध और गुलाब से नहाने की बात का उल्लेख ग्रंथों में हुआ है. भारत में तो प्राचीन काल में इसे लेकर बकायदा एक पूरी किताब ही लिखी गई थी. ब्रिटेन में महिलाएं आर्सेनिक या कृमि का इस्तेमाल करती थीं.

कहा जाता है कि सबसे पहले चेहरे पर मेकअप की शुरुआत प्राचीन मिस्र में हुई. तब महिलाएं वहां रसायनों और अन्य उत्पादों से बने लेप को चेहरे को सुंदर बनाने के लिए इस्तेमाल करने लगीं. वो वस्त्र सज्जा और आभूषणों से खुद को सजाने में कतई पीछे नहीं रहती थीं. प्राचीन मिस्र में सौंदर्य प्रसाधनों पर बहुत काम किया गया था. जो कास्मेटिक्स और सौंदर्य प्रसाधन हम आज देखते हैं, उसकी बहुत हद तक प्रेरणा प्राचीन मिस्र और भारत से ली गई.

रानी नेफरिती को रोज इत्रों से मला जाता था
प्राचीन मिस्र की रानी नेफरिती को अपनी सुंदरता का बड़ा ख्याल था, उनकी गिनती दुनिया की सुंदर महिलाओं में की जाती थी. मिस्र की स्त्रियां उनके फैशनेबल तौरतरीकों की दीवानी थीं. नेफरिती का मतलब है-सुंदर महिला का आगमन. नेफरिती के गले पतले और लंबे थे और आंखें हिरनी की तरह सम्मोहक. उन्हें सुंदर रखने के लिए उनकी दासियां खूब जतन करती थीं. उन्हें जैतून के तेल, तमाम तरह के इत्रों से रोज मला जाता था, लेप लगाए जाते थे. फिर केस, नयन, कर्ण, मुख सज्जा से लेकर वस्त्र सज्जा होती थी.

प्राचीन मिस्र की रानी नेफरिती को अपनी सुंदरता का बड़ा ख्याल था, उनकी गिनती दुनिया की सुंदर महिलाओं में की जाती थी. मिस्र की स्त्रियां उनके फैशनेबल तौरतरीकों की दीवानी थीं. (File Photo)

क्लियोपेट्रा के पास सुंदर रहने कई सीक्रेट थे
हालांकि मिस्र की एक और रानी क्लियोपेट्रा तो उनसे आगे थीं. क्लियोपेट्रा के सौंदर्य और सम्मोहन को लेकर दुनिया में बहुत कहा और लिखा गया. आज भी जब बात सौंदर्य की चलती है तो सहज ही पैमाना बनकर क्लियोपेट्रा सामने आ जाती हैं. उनके पास सौंदर्य के इतने तरह के गुप्त रहस्य थे कि उन्होंने इस पर एक किताब ही लिख दी थी.

विभाग जो रानी को सुंदर बनाए रखने पर शोध करता था
कहा जाता है कि क्लियोपेट्रा ने एक अलग विभाग बना रखा था, जो अपनी रानी को सुंदर और युवा बनाए रखने के लिए तमाम युक्तियां और शोध करता रहे. सही मायनों में दूध और गुलाब के स्पा को मिस्र की इस चर्चित और बेइंतिहा सुंदर रानी ने सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनाया. वह अपने चेहरे पर एक खास मिट्टी से लेप कराती थीं, ताकि इसकी चमक बढ़ सके.

क्लियोपेट्रा ने एक अलग विभाग बना रखा था, जो अपनी रानी को सुंदर और युवा बनाए रखने के लिए तमाम युक्तियां और शोध करता रहे. (file photo)

लंबे बाल गूंथे जाते थे, होठों का मेकअप होता था
उनके लंबे बालों में रोज एक खास तरह तरीके से वीथिकाएं गूथी जाती थीं. आंखों में आइलाइनर होता था, होठों का खास मेकअप होता था. रोज वह अलग डिजाइन के आभूषणों और वस्त्रों का इस्तेमाल करती थीं. शायद वह दुनिया की पहली ऐसी स्त्री रही होंगी, जिसने अपने राज में सौंदर्य से जुडे आभूषण, वस्त्र और प्रसाधन उद्योग को प्रेरणा देने का काम किया.

दुनियाभर के सौंदर्य उत्पादों के व्यापारी दरबार में आते थे
तब दुनियाभर से सौंदर्य से जुड़ी वस्तुओं के व्यापारी क्लियोपेट्रा के दरबार में पहुंचते थे. अपनी नायाब वस्तुओं को पेश करते थे. अगर वो सामान क्लियोपेट्रा को पसंद आ गए तो मानिए वो सामान बाजार में हिट हो गया. प्राचीन मिस्र में वैसे सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल की अनुमति एक खास वर्ग को ही थी. मेकअप और साजसज्जा से पदगरिमा और वर्ग का भी पता चलता था.

प्राचीन भारत में सिंधू घाटी सभ्यता से पहले से ही यानि करीब 2500 ईसापूर्व में सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल और स्त्रियों के शरीर सौंदर्यीकरण के सबूत मिलते हैं. (file photo)

हर कोई नहीं रख सकता था लंबे बाल
मसलन अभिजात्य और राजसी खानदान से जुड़ी महिलाएं ही लंबे बाल रख सकती थीं लेकिन छोटे वर्ग को इसकी सख्त मनाही थी, उन्हें अपने बालों को काटकर छोटा ही रखना होता था. सौंदर्य को बनाए रखने के लिए क्लियोपेट्रा कुछ अजीबोगरीब चीजों का इस्तेमाल करती थीं-मसलन उसके फेसपैक के लिए मगरमच्छ की लीद और गधे के दूध के मिश्रण का इस्तेमाल होता था.

सिंधू घाटी सभ्यता में भी सबूत
प्राचीन भारत में सिंधू घाटी सभ्यता से पहले से ही यानि करीब 2500 ईसापूर्व में सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल और स्त्रियों के शरीर सौंदर्यीकरण के सबूत मिलते हैं. महाभारत में जब पांडवों को वनवास हुआ तो अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने राजा विराट के यहां अलग अलग रूप धरकर शरण ली. तब द्रोपदी सैरंध्री यानि महल की दासी बन गई. इस बात के विवरण मिलते हैं कि वह अपने साथ हमेशा एक प्रसाधन पेटिका रखती थीं, जिसमें सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं और आभूषण होते थे.

16 श्रृंगार में सिर से लेकर पैर तक पर ध्यान
सोलह श्रंगार की अवधारणा हमारे देश में प्राचीन काल से थी. सोलह श्रृंगार मतलब पैर के नाखून से लेकर सिर तक का मेकअप. मौसम और ऋतुओं के अनुसार शरीर को निखारने वाले लेप का इस्तेमाल होता था. ठंड के समय लेप में इस्तेमाल होने वाली सामग्री गरमी में इस्तेमाल होने सामग्री से एकदम अलग होती थी.

सौंदर्य प्रसाधन पर लिखी गई अष्टांग हृदय के नाम से किताब
भारत में तो आयुर्वेद के तहत डेढ हजार साल पहले अष्टांग हृदय नाम से आठ ऋतुओं में सौंदर्य प्रसाधनों पर एक पूरी किताब लिखी गई थी. भारत में खास सौंदर्य के कामों में तैलम यानि तेल और घृत (मक्खन या घी) का इस्तेमाल होता था. यहीं नहीं भारत में तो धार्मिक तौर पर दांतों, मुंह और होठों की सज्जा पर जोर दिया जाता था, इसे सौंदर्य के साथ स्वच्छता से जोडक़र भी देखा जाता था.

कैसे आधुनिक कास्मेटिक्स भारत की देन
माना जाता है कि आधुनिक कास्मेटिक्स की समूची श्रृंखला ही प्राचीन भारत की देन है. भारत का प्राचीन सौंदर्य विज्ञान में योग की भी खासी महत्ता थी. यानि बाह्य रूप के साथ आंतरिक शरीर प्रणाली की बेहतरी पर जोर. वैशाली की नगरवधू आम्रपाली को दुनिया की सबसे सुंदर महिलाओं में गिना जाता है. आम्रपाली के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी दिनचर्या में एक हिस्सा योग को जरूर देती थी ताकि काया कमनीय रहे और मन सुवासित. आम्रपाली खुद इतनी मोहक थी कि उसकी सुंदरता के चर्चे दूर दूर तक फैले थे लेकिन सौंदर्य प्रसाधनों से श्रृंगार के बाद वह अपूर्व सुंदरी और जादुई अप्सरा की भांति प्रतीत होती थी.

भारतीय महिलाएं अपने मोहक रूप-रंग और चमकती आंखों के कारण सबसे सुंदर मानी जाती थीं. इसके लिए उस विज्ञान को धन्यवाद कहा जाना चाहिए, जिसे आयुर्वेद कहा जाता है, जो जीवन का भी विज्ञान था.

पान के पत्तों से लेकर शहर और जैतून तक
त्वचा की सफाई में गौमूत्र का बड़ा महत्व था. मुगलकाल में महिलाएं मानती थीं कि पान के पत्तों को चबाने से सौंदर्य बढता है. इसलिए आवश्यक तौर पर वो इसे खाया करती थीं, ये न केवल उनके होठों को लाल रखता था बल्कि दांतों की भी रक्षा करता था.

हालांकि प्राचीन यूनान में सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल के पैमाने अलग थे. वो शरीर सौष्ठव पर ज्यादा ध्यान देते थे. इसलिए उनकी सुंदर महिलाएं हमेशा कम मेकअप में नजर आएंगी. हां, मेकअप में वो शहद और जैतून के तेल के इस्तेमाल पर खासा जोर देते थे. बालों की सज्जा पर खास जोर होता था. जापान में प्राचीन काल में गीसाएं आंखों के गहरे मेकअप पर काफी जोर देती थीं.

जापान में क्या होता था पैमाना
जापानी महिलाओं की सुंदरता की माप उनके लंबे बालों से भी होती थी. इसका आदर्श पैमाना होता था कमर से कम से कम दो फीट नीचे तक आते हुए बाल.

ब्रिटेन में आर्सेनिक का सेवन
ब्रिटेन में क्वीन एलिजाबेथ के दौर में वह सुंदरता का प्रतिमान मानी जाती थीं. ब्रिटेन में तब कास्मेटिक्स के इस्तेमाल को बहुत अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता था, क्योंकि वो मानते थे कि इससे त्वचा के सतह पर ऊर्जा रूक जाती है, जिससे नकारात्मकता हावी होने लगती है. चेहरे को निखारने के लिए कच्चे अंडे के सफेद हिस्से का इस्तेमाल होता था.

वैसे हैरानी की बात है कि श्वेत त्वचा पर निखार बना रहे इसके लिए एलिजाबेथ दौर की महिलाएं आर्सेनिक का सेवन करती थीं हालांकि इससे उनकी उम्र कम हो जाती थी. इसी तरह वो एक और हैरानी का काम करती थीं, तब की महिलाएं खुशी खुशी फीता कृमि निगल लिया करती थीं, ताकि ये फीताकृमि उनके द्वारा खाए गए ज्यादातर खाने का सेवन कर ले और वो स्लिम-ट्रिम रह सकें.

Tags: Beauty and the beast, Beauty Tips, South Indian Beauty, Women

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