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क्‍लाइमेट चेंज से सेहत पर पड़ता है बहुत बुरा असर, हो सकती हैं ये बीमारियां

हाइलाइट्स

क्‍लाइमेट चेंज होने पर सबसे ज्‍यादा प्रभाव दिमाग पर पड़ता है. एयर क्‍वालिटी खराब होने से बढ़ रही है सांस संबंधी समस्‍याएं.

Climate Change effect-  क्‍लाइमेट चेंज मानव स्‍वास्‍थ्‍य को कई तरह से प्रभावित करता है. मौसम और पर्यावरण में अत्‍यधिक बदलाव कई प्रकार की हेल्‍थ प्रॉब्‍लम्‍स को बढ़ा सकता है. पिछले कुछ सालों में बेमौसम बारिश, अधिक सर्दी या गर्मी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्‍लोबल वार्मिंग क्‍लाइमेट चेंज की मुख्‍य वजह हो सकती है जिसपर काबू पाना बेहद जरूरी है. माना जा रहा है कि क्‍लाइमेट चेंज से यूथ को कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है. इससे अस्‍थमा, स्‍किन एलर्जी और लंग्‍स प्रॉब्‍लम को बढ़ावा मिलेगा.

WHO की रिपोर्ट के अनुसार बीमारी फैलाने वाले वायरस को बढ़ाने में तापमान और बारिश की अहम भूमिका होती है. प्रदूषण और टॉक्सिक फूड शारीरिक और मानसिक समस्‍याओं का कारण बन सकते हैं. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि क्‍लाइमेट चेंज के कुछ प्रभाव 2030 और 2050 के बीच प्रतिवर्ष 250,000 मौत के जिम्‍मेदार हो सकते हैं. चलिए जानते हैं क्‍लाइमेट चेंज से कौन सी बीमारियां लोगों को परेशान कर सकती हैं.

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य
मौसम और प्राकृतिक आपदाएं लोगों के लिए दर्दनाक और तनावपूर्ण हो सकती हैं जिससे उनके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. मेडिकल न्‍यूज टुडे के अनुसार क्‍लाइमेट चेंज से सबसे ज्‍यादा प्रभाव लोगों के मस्‍तिष्‍क पर पड़ रहा है. मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति वाले लोगों पर अत्‍य‍धिक गर्मी का प्रभाव पड़ सकता है जिससे आत्‍महत्‍या की दर में वृद्धि हो सकती है. सीडीसी के अनुसार क्‍लाइमेट चेंज और बढ़ा हुआ तापमान लोगों के दिमाग पर असर डाल सकता है जिस वजह से मानसिक रोग बढ़ सकते हैं.

इंफेक्‍शन
WHO के अनुसार क्‍लाइमेट चेंज से इंसेक्‍ट ट्रांसमिटेड इंफेक्‍शन और वाटरबोर्न डिजीज ब की संभावनाएं हैं. क्‍लाइमेट चेंज से बीमारी की अ‍वधि बढ़ सकती है जिस वजह से इंसेक्‍ट इंफेक्‍शन फैल सकता है. वहीं बारिश के पैटर्न में बदलाव से वाटरबोर्न डिजीज और डायरिया का कारण बनने वाले इंफेक्‍शन का खतरा भी बढ़ सकता है.

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हार्ट संबंधी समस्‍याएं
बढ़ते तापमान की वजह से कई हेल्‍थ प्रॉब्‍लम्‍स बढ़ सकती हैं. अधिक गर्मी में रहने के कारण लू, स्‍ट्रोक, मांसपेशियों में ऐंठन, हार्ट प्रॉब्‍लम और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. गर्मी के कारण सबसे ज्‍यादा हेल्‍थ प्रॉब्‍लम का सामना बच्‍चे, व्‍यस्‍क, लेबर क्‍लास और सड़क पर रहने वाले लोग करेंगे. एयर क्‍वालिटी खराब होने के साथ हार्ट संबंधी समस्‍याओं में इजाफा हो सकता है. लोगों को रेस्पिरेटरी और स्‍मोक एक्‍सपोजर का सामना करना पड़ सकता है.

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सांस संबंधी समस्‍याएं
वायु प्रदूषण में वृद्धि होने से कई प्रकार की रेस्‍पिरेटरी संबंधित समस्‍याओं को बढ़ने में मदद मिल सकती है. हवा में धूल, ओजोन और महीन कणों का उच्‍च एयर क्‍वालिटी को कम कर सकता और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कई समस्‍याओं का कारण बन सकता है. इससे दमा, क्रोनिक ऑब्‍सट्रक्टिव पल्‍मोनरी डिजीज, खांसी और गले में जलन, फेफड़ों में सूजन, कैंसर, छाती में दर्द, क्रोनिक अस्‍थमा और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है.

Tags: Health, Health problems, Lifestyle

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