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घोड़े पर सवार..खूंखार नहीं बल्कि सूट-बूट वाले विलेन थे अजीत,जिन्हें ‘सारा शहर लायन के नाम से जानता था’

नई दिल्ली: ‘सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है’‘लिली डोंट बी सिली’ और ‘मोना डार्लिंग’.. ये डायलॉग्स सुनते ही आपके जेहन में एक ही तस्वीर उभरती है जिनका नाम है अजीत खान (Ajit Khan). करीब 4 दशक तक 200 फिल्मों में अपना खौफ कायम रखने वाले अजीत का निधन 22 अक्टूबर 1998 में हुआ था. माता-पिता ने नाम रखा था हामिद अली खान (Hamid Ali Khan) लेकिन अपने स्टेज नाम अजीत से मशहूर हो गए. अजीत एक ऐसे उम्दा कलाकार थे जिसने भारतीय सिनेमा में खलनायक की बनी-बनाई छवि तोड़ी थी और पर्दे पर एक सज्जन दिखने वाला, पढ़ा-लिखा, सफेद जूते और कोट-पैंट पहने पाइप मुंह में दबाए रौबदार विलेन नजर आया. बॉलीवुड में एक अलग मुकाम हासिल करने वाले अजीत की असल जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं रही.

27 जनवरी 1922 में हैदराबाद में जन्मे बॉलीवुड के मशहूर विलेन अजीत खान ने 70 के दशक में दर्शकों को एक नए अंदाज वाले खलनायक से मुलाकात करवाई थी. ये विलेन ना तो घोड़े पर सवार होकर काले कपड़े से मुंह बांधे आता था, ना ही महाजन-सूदखोर की तरह काइयां दिखता था, ये तो किसी होटल, पब-बार में नजर आता था. अपनी अनोखी संवाद अदायगी के लिए मशहूर अजीत ना तो ऊंची आवाज में बात करते थे, ना ही चीखते-चिल्लाते थे, लेकिन अपनी धीमी आवाज में डायलॉग डिलीवरी कर सिनेमाघर में बैठे दर्शकों को सिहरन से भर देते थे.

 ‘सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है’
अजीत ने यूं तो तमाम फिल्मों में काम किया लेकिन फिल्म ‘कालीचरण’ में जब स्क्रीन पर बोला ‘सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है’ तो दर्शक बेहतरीन डायलॉग डिलेवरी के मुरीद हो गए. इस मशहूर डायलॉग की वजह से दर्शक आज भी उन्हें याद करते हैं. अजीत खान हिंदी सिनेमा के एक ऐसे विलेन रहे जिनकी अदायगी कई बार फिल्म के हीरो पर भारी पड़ी. अजीत की असल जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.

सीमेंट पाइप में रहते थे अजीत
अजीत बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे. अजीत पर एक्टिंग का जुनून इस कदर सवार था कि कहते हैं कि अजीत ने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी किताबों को बेचा और उससे मिले पैसे से हैदराबाद छोड़ मायानगरी आ गए.  अजीत घर से भागकर मायानगरी आ तो गए लेकिन ना तो रहने का ठिकाना था ना खाने का. ऐसे में उन्होंने सिर छिपाने के लिए सीमेंट की पाइपों में अपना ठिकाना बनाया. लेकिन मुसीबत ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा. लोकल गुंडे पाइप में रहने वालों से हफ्ता वसूली किया करते थे. पैसे नहीं देने पर पिटाई करते थे. एक दिन अजीत ने गुंडों को ही पीट दिया और वहां रहने वालों के लिए हीरो बन गए थे.

हीरो बनना चाहते थे अजीत
हालांकि अजीत कभी विलेन नहीं बनना चाहते थे, उनका तो ख्वाब हीरो बनने का था. अजीत ने शुरुआती दौर में कुछ फिल्मों में बतौर हीरो काम भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली, लेकिन जब विलेन की भूमिका में उतरें तो मशहूर हो गए. अजीत ने अपनी शानदार एक्टिंग से हिंदी सिनेमा में अपने किरदारों को सदा के लिए अमर कर दिया.

Tags: Actor, Birth anniversary

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