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डाइजेशन को सुधारने के साथ बीपी को भी कंट्रोल रखता है लोबिया, इस देश में सबसे पहले हुई इसकी पैदावार

हाइलाइट्स

लोबिया का नियमित सेवन शुगर के जोखिम को भी कम कर सकता है. भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में लोबिया का वर्णन है.नॉनवेज के साथ उबले हुए लोबिया को भी खूब खाया जाता है.

पाचन सिस्टम कमजोर होना और ब्लड प्रेशर की समस्या, ये दोनों आजकल आम हो गए हैं. अगर आहार के बूते इन्हें कंट्रोल करना है तो लोबिया से बढ़िया कोई भोजन नहीं है. इसमें जो विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, वह शरीर के लिए खासे गुणकारी हैं. वजन बढ़ने से रोकने में भी योगदान देता है लोबिया. अफ्रीका से चली इसकी फसल अब पूरी दुनिया में खाई जा रही है. कई देशों में तो नॉनवेज के साथ उबला लोबिया खूब खाया जाता है.

फ्राइड या ग्रिल नॉनवेज के साथ उबले लोबिया का संगम

कई देशों में लोबिया को काली आंख वाली मटर (Black-Eyed Pea) भी कहा जाता है. असल में यह फलियों से निकली एक तरह की दाल या मटर ही है, जिसमें पोषक तत्व भरपूर हैं. भारत में तो हजारों सालों से इसका उपयोग भोजन के रूप में ही हो रहा है लेकिन कई देशों में शुरुआती देशों में इसे पशुओं के चारे के रूप भी इस्तेमाल किया जाता था. बाद में उन देशों ने इसकी फली के गुण देखकर इसे आहार में शामिल कर लिया. पश्चिमी देशों में जहां नॉनवेज बहुत अधिक खाया जाता है, वहां फ्राइड या ग्रिल नॉनवेज के साथ उबले हुए लोबिया को भी खूब खाया जाता है, उसका कारण यह है कि इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है जो नॉनवेज को पचाने में सहायता करता है.

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दक्षिण अफ्रीका में उपजा लोबिया पूरी दुनिया में छाया

लोबिया की खेती के इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि करीब 5 हजार साल पूर्व अफ्रीका में इसकी खेती शुरू हो गई थी. उसके बाद यह लैटिन अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका में पहुंच गया. माना जाता है कि शुरुआती दौर में यह भारत में भी उगाया गया, लेकिन इसके पुष्ट प्रमाण नहीं है.

भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में लोबिया का वर्णन है

अमेरिकी-भारतीय वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने इसका उत्पत्ति केंद्र इथियोपिन सेंटर प्रमाणित किया है, जिसमें नॉर्थ ईस्ट अफ्रीकन देश इरीट्रिया, अबीसीनिया, सोमानीलैंड और इथियोपिया शामिल हैं. वैसे सातवीं-आठवीं ईसा पूर्व लिखे गए भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में लोबिया का वर्णन है और इसे शरीर के लिए रुचिकर, मधुर, भारी के अलावा कफ-वीर्य व अम्लपित्त को बढ़ाने वाला बताया गया है.

पाचन सिस्टम सुधारेगा, वजन भी कम रहेगा

आधुनिक विज्ञान के अनुसार लोबिया को चेक किया जाए तो 100 ग्राम लोबिया में ऊर्जा 336, कार्बोहाइड्रेट 60.03 ग्राम, प्रोटीन 23.52 ग्राम, कुल वसा 1.26 ग्राम, कोलेस्ट्रॉल 0 और आहार फाइबर 10.6 ग्राम पाया जाता है. आहार विशेषज्ञ व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार आजकल उन आहार का प्रचलन खासा बढ़ गया है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर हो, इनमें लोबिया भी एक है.

इसकी विशेषता यह है कि इसका सेवन पाचन सिस्टम को दुरुस्त रखता है. अगर यह सिस्टम दुरुस्त है तो आपका वजन भी ज्यादा नहीं बढ़ेगा, जिसके चलते ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहेगा. वनस्पति विज्ञान यह भी कह रहा है कि लोबिया का नियमित सेवन शुगर के जोखिम को भी कम कर सकता है.

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ज्यादा खा लिया तो पेट में गैस बन जाएगी

उनका कहना है कि लोबिया में सूजन कम करने वाले अवयव भी हैं. चूंकि यह कार्बोहाइड्रेट का एक समृद्ध स्रोत हैं, जिससे पेट भरा-भरा सा महसूस रहेगा, इससे भूख कम लगेगी, पाचन सिस्टम दुरुस्त रहेगा और मोटापा पास नहीं. यह शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल को भी बनने से रोकता है.

लोबिया को भोजन में धीरे-धीरे और कम मात्रा में शामिल करें.

लोबिया में बीटा कैरोटीन की प्रभावशाली मात्रा होती है, जिसे शरीर अपने-आप विटामिन ए में बदल देता है. इससे आंखों की रोशनी ठीक रहेगी और स्किन भी बेहतर रहेगी. इसे ज्यादा खाने का नुकसान यह है कि पेट में गुड़गुड़ाने लगेगा और डकार की प्रवत्ति पैदा होने लगेगी. कुछ लोगों में लोबिया से एलर्जी की भी समस्या देखी गई है. उसका निदान यह है कि लोबिया को भोजन में धीरे-धीरे और कम मात्रा में शामिल करें.

Tags: Food, Lifestyle

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