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थायरॉयड की वजह से फर्टिलिटी को भी पहुंच सकता है नुकसान, जानिए कैसे करें इसे कंट्रोल

हाइलाइट्स

जब शरीर में थायरॉक्सिन हार्मोन आवश्यकता से कम मात्रा में बने तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैंथॉयरॉक्सिन हार्मोन की कमी के कारण प्रजनन क्षमता कमजोर होने लगती है इस बीमारी में मेमोरी प्रोब्लम, थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं

Thyroid hormone: थायरॉयड तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है जो गले से नीचे गर्दन के बेस में होती है. यह बेशक बहुत छोटी ग्रंथि है लेकिन पूरे शरीर के नियंत्रण और नियमन में इसकी बेमिसाल भूमिका है. यह ग्रंथि एंड्रोक्राइन प्रणाली को संतुलित रखती है. थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन मेटाबोलिज्म को संतुलित करते हैं. थायरॉयड हार्मोन दिल की गति, पाचन, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और एनर्जी के स्तर को प्रभावित करता हैं. थायरॉयड ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन में यदि थोड़ी भी कमी या वृद्धि हो जाए तो इसका भावनात्मक असर शरीर पर पड़ता है.

शरीर में अगर थायरॉयड हार्मोन ज्यादा हो जाता है तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं जबकि कम हो जाने पर हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी होती है. थायरॉयड हार्मोन की कमी के कारण महिला और पुरुषों दोनों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है.

थायरॉयड हार्मोन में कमी और वृद्धि के लक्षण
थायरॉयड हार्मोन में कमी के कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, थकान, वजन कम या ज्यादा होने लगता है. इससे कई तरह की बीमारियां होती है. थायरॉयड में गड़बड़ियों की वजह से गले में सूजन या गला मोटा होने लगता है. मूड स्विंग करने लगता है जिसके कारण गुस्सा बहुत आता है. इसके अलावा बाल झड़ना और बॉडी में कमजोरी महसूस होना, नींद में कमी आना भी इसके लक्षण हैं.

हाइपोथायरायडिज्म क्या है
हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक जब शरीर में थायरॉक्सिन हार्मोन आवश्यकता से कम मात्रा में बने तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं. इसमें थायरॉयड ग्रंथि बहुत कम सक्रिय रहती है. इसके कारण शरीर की कुछ जरूरी प्रक्रियाएं बहुत स्लो हो जाती है. इस बीमारी के साथ-साथ यदि डायबिटीज की समस्या हो तो स्थिति ज्यादा खतरनाक हो जाती है.

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण
हाइपोथायरायडिज्म के कारण यानी थॉयरॉक्सिन हार्मोन की कमी के कारण प्रजनन क्षमता कमजोर होने लगती है. मेमोरी प्रोब्लम की समस्या होने लगती है. इसके अलावा थकान, ड्राई स्किन, अनिद्रा, चिंता, अवसाद, बेचैनी, वजन बढ़ना, हार्ट रेट कम होना, जोड़ों का दर्द, मसल्स में कमजोरी, पीरियड्स में अनियमितता आदि लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं. करीब 2 से 4 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित होती है. लो थायरॉयड के कारण या तो अंडा रिलीज ही नहीं होता या यह अनियमित हो जाता है. इससे मां बनने में परेशानी होती है.

कैसे करें कंट्रोल
हाइपोथायरायडिज्म का तुरंत इलाज कराना चाहिए. तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए. सबसे पहले डॉक्टर इसके कारणों का पता लगाते हैं. आयोडीन की कमी, पिट्यूटरी ग्लैंडमें सूजन और कुछ बीमारियों की दवाइयों के कारण ऐसा हो सकता है. अल्ट्रासाउंड और अन्य तरह के टेस्ट से इसकी जांच की जाती है. इसके बाद दवाइयां दी जाती है.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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