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दिवाली से पहले का मौसम दे रहा बीमारियां, डॉक्‍टर बोले- इन 3 चीजों का रखें ध्‍यान

नई दिल्‍ली. श्राद्ध पक्ष के आते ही दिवाली की आहट दस्‍तक देने लगती है. एक तरफ त्‍यौहारों की उमंग होती है तो वहीं गर्मी और बारिश का मौसम बदलकर सर्दी का मौसम शुरू होने लगता है. इस मौसम में जहां सुबह और शाम के समय हल्‍की ठंड रहती है जबकि दोपहर में भीषण गर्मी पड़ती है. यही वजह है कि यह मौसम बीमारियों को निमंत्रण देने वाला मौसम कहलाता है. इस मौसम में न केवल कई प्रकार की मौसमी, संक्रामक, जलजनित और खान-पान संबंधी बीमारियां तेजी से फैलती हैं बल्कि सामान्‍य अवस्‍था में भी लोगों को तबियत ठीक नहीं होने का अहसास होता रहता है.

स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की मानें तो इस मौसम में हर साल ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप रहता है लिहाजा दिवाली से पहले वाले इस मौसम में कुछ विशेष सावधानियां बरतना जरूरी हैं ताकि बीमारियों से रोकथाम की जा सके. हालांकि इस बार कोरोना, स्‍वाइन फ्लू जैसे वायरस भी संक्रमण फैला रहे हैं, वहीं वायरल फीवर के अलावा मच्‍छरों की वजह से डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं. इसके साथ ही खान-पान में लापरवाही की वजह से डायरिया, उल्‍टी, पेट में दर्द, पीलिया और संक्रमित या दूषित पानी पीने की वजह से टायफॉयड या पैरा टायफॉयड जैसी बीमारियां भी लोगों को घेर रही हैं.

इन तीन चीजों का रखें ध्‍यान

खान-पान और कपड़े पहनने में बरतें सावधानी
दिल्‍ली म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में डेंगू-मलेरिया के नोडल ऑफिसर रह चुके डॉ. सतपाल कहते हैं कि यह मौसम काफी संवेदनशील होता है. इस समय न सर्दी का पता चलता है और न ही गर्मी का. जबकि सुबह-शाम आती हुई सदी और दोपहर को तेज गर्मी के चलते लोगों में खान-पान और पहनावे को लेकर भी कन्‍फ्यूजन भी रहता है. ऐसे में सबसे पहला काम ये करें कि इस मौसम में न तो एकदम ठंडा और न ही तेज गर्म चीजें खाएं. फ्रिज का पानी पीना बंद कर दें. बाजार में मिलने वाला खाना भी न खाएं. बारिश के बाद मौसम के चलते खाने में बैक्‍टीरिया पनपने, इस मौसम में मक्‍खी-मच्‍छरों के चलते खाना दूषित होने की सबसे ज्‍यादा संभावना रहती है लिहाजा खुला खाना भी न खाएं. ताजा खाना खाएं. बासी खाना खाने से बचें. फ्रिज में ज्‍यादा दिनों का रखा हुआ भोजन भी न करें. खाना हल्‍का गर्म खाएं. मौसमी फलों का सेवन करें.जगह-जगह का बदलकर पानी न पीएं. इसके साथ ही पूरी आस्‍तीन के कपड़े पहनें. एसी के कम तापमान में न सोएं, कोशिश करें एसी का तापमान 24 से 26 के बीच में रहे.

साफ-सफाई रखें, मक्‍खी-मच्‍छरों से बचें
डॉ. सतपाल कहते हैं कि दूसरी जो सबसे बड़ी चीज है वह है इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्‍यान रखें. घर में मक्‍खी और मच्‍छरों को न आने दें. एसी, कूलर, फूलदान या घर में जहां भी कई दिनों का पानी इकठ्ठा है उसे साफ कर दें. खासतौर पर टॉयलेट और रसोई को साफ रखें. हाथों को साबुन से साफ करते रहें. खाना बनाते और खाते वक्‍त भी सफाई का ध्‍यान रखें. गीले कपड़े पहनने या ओढ़ने में इस्‍तेमान न करें, इससे सर्द-गर्म का खतरा पैदा हो जाता है.

वायु प्रदूषण से करें बचाव
डॉ. सतपाल कहते हैं कि इस मौसम की एक और जो बड़ी आफत है वह प्रदूषण है. खासतौर पर दिल्‍ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को इससे बचने की सबसे ज्‍यादा जरूरत है. यहां की प्रदूषित हवा बीमारियों को पैदा करने और उन्‍हें बढ़ाने के लिए पर्याप्‍त है. इसकी वजह से न केवल दमा, अस्‍थमा, खांसी, छींके, आंखों में जलन, आंखें लाल होना, सांस लेने में दिक्‍कतें, अस्‍थमा का अटैक, सांस की बीमारी फिर से उखड़ जाना, दम घुटने जैसी परेशानियां पैदा हो जाती हैं. सितंबर आने के साथ ही प्रदूषण की चादर दिल्‍ली-एनसीआर को परेशान करना शुरू कर देती है ऐसे में इस मौसम में बाहर घूमने से बचें. घरों में रहें. सुबह और शाम को जब धुंध होती है तो पार्क और सड़कों पर टहलने न जाएं. घरों में एयर प्‍यूरिफायर लगा सकते हैं. गुड़ खाएं. बाहर निकलें तो मास्‍क जरूर पहनें. घर लौटकर हाथ-मुंह अच्‍छे से धोएं या नहाएं. आंखों पर चश्‍मा लगाकर बाहर निकलें. बच्‍चों को बाहर ज्‍यादा न खेलने दें. प्रदूषण के सीधे संपर्क से बचें.

Tags: Air pollution, Air Pollution AQI Level, Diwali, Diwali festival

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