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महिलाएं हेल्थ से जुड़ी इन परेशानियों के बारे में जरूर जानें, वक्त रहते कर लें बचाव

हाइलाइट्स

प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेन स्‍ट्रोक होना भी गंभीर समस्या है.पोस्टमेनोपॉज़ल ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ा देता है.

Most Common Health Issues For Women: वैसे तो पुरुषों और महिलाओं को अपने पूरे जीवन में कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन कुछ ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्‍याएं होती हैं जिससे पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक प्रभावित होती हैं. यही नहीं, शरीरिक रूप से अंतर होने की वजह से कुछ बीमारियां महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं, जिनकी जानकारियां कई बार लड़कियों या महिलाओं को नहीं होती. ये बीमारियां हर उम्र में अलग अलग तरीके से उन्‍हें प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे में अगर वे सही समय पर अपने शरीर और इससे जुड़ी बीमारियों की जानकारी हासिल रखें तो वे खुद का सही तरीके से देखभाल कर सकेंगी.

महिलाओं में होने वाली कॉमन बीमारियां

हार्ट डिजीज : महिलाओंं में सबसे ज्‍यादा मौतों की वजह है हार्ट की बीमारियां. इसके आम लक्षण सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और बाहों में कमजोरी आदि है, जबकि महिलाओं को मतली या उल्टी का अनुभव होना भी हार्ट डिजीज का लक्षण हो सकता है. महिलाएं इन लक्षणों को आमतौर पर इग्‍नोर कर देती हैं. एनएम के मुताबिक, जब तक महिलाओं में  पीरियड्स होते रहते हैं तब तक उन्‍हें हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है जबकि मेनोपॉज के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है. इसकी वजह ब्‍लड प्रेशर में बदलाव, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना और एस्ट्रोजन का कम प्रोडक्‍शन आदि हो सकता है.

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प्रेगनेंसी में स्‍ट्रोक होना : प्रेगनेंसी के दौरान स्‍ट्रोक होना एक कॉमन हेल्‍थ प्रॉब्‍लम है. यह प्रेगनेंसी में हाई ब्‍लड प्रेशर होने और शरीर में ब्‍लड क्‍लॉटिंग की वजह से हो सकता है. यह प्रेगनेंसी के अलावा भी महिलाओं को इफेक्‍ट कर सकता है. दरअसल जब ब्‍लड हमारे वेंस में बेहतर तरीके से फ्लो नहीं कर पाता या ब्रेन में खून के पहुंचने में रुकावट होने लगती है तो स्‍ट्रोक होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है. एक्‍सेसिव ब्‍लड क्‍लॉटिंग की समस्‍या प्रेगनेंसी में काफी अधिक होती है.

यूरीनल ट्रैक इंफेक्‍शन : यह समस्‍या महिलाओं में काफी अधिक देखने को मिलती है. दरअसल पुरुषों की तुलना में महिलाओं के शरीर में बैक्‍टीरिया यूरीनल ट्रैक से होता हुआ ब्‍लैडर में आसानी से पहुंच सकता है. जिसकी वजह से अधिक पेशाब होना, जलन, खुजली, दर्द, बुखार आदि के लक्षण दिखने लगते हैं. ऐसे में तुरंत डॉक्‍टर का इलाज जरूरी होता है.

ब्रेस्‍ट कैंसर : महिलाओं में ब्रेस्‍ट कैंसर एक साइलेंट किलर की तरह जाना जाता है. इसकी वजह से हर साल दुनियाभर में लाखों महिलाओं की जान चली जाती है. ऐसे में डॉक्टर के परामर्श से 25 साल की उम्र से महिलाओं को इसका स्क्रीनिंग नियमित रूप से कराना बहुत जरूरी है. इसकी जानकारी एक्स-रे मैमोग्राफी, स्तन अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी और पीईटी स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षणों से किया जा सकता है.

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ऑस्टियोपोरोसिस : ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो आपकी हड्डियों को कमजोर कर देती है जिससे फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है. पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े फ्रैक्चर का खतरा अधिक होता है. इसके लिए आप अपने डाइट में अधिक से अधिक कैल्शियम रिच फूड को शामिल करें और वेट कंट्रोल में रखें. धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें.

Tags: Health, Lifestyle, Women, Women Health

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