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मिनरल का भंडार चीकू तुरंत देता है एनर्जी, भारत में लोकप्रिय इस विदेशी फल के बारे में जानें दिलचस्प बातें

हाइलाइट्स

चीकू एक विदेशी फल है, लेकिन भारत से इसका अपनापन है. चीकू उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पेड़ है.करीब 1000 साल पहले इसकी पैदावार दक्षिणी मैक्सिको, मध्य अमेरिका के हिस्सों में हुई.

Chiku Benefits and its History: गोल-गोल, रस और अनूठी मिठास से भरपूर चीकू एक ऐसा फल है, जो खाते ही शरीर को ऊर्जा से भर देता है. इस फल में प्रतिरोधी क्षमता भी भरपूर है, इसलिए यह शरीर के लिए बेहद गुणकारी है. यह एक विदेशी फल है, लेकिन भारत से इसका अपनापन है. इसके उत्पादन में भारत प्रमुख देशों में से एक है और इसे एक्सपोर्ट भी किया जाता है. इसका उत्पादन कम होता है, लेकिन शरीर के लिए बेहद लाभकारी है.

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मिठास ऐसी जैसे गूदे में डली हो चीनी

अगर कोई व्यक्ति बीमार होता है या अस्पताल में दाखिल है तो डॉक्टर उसे चीकू खाने की सलाह ज़रूर देते हैं. आप मरीज से मिलने भी जाएंगे तो प्रयास होगा कि उसके लिए चीकू ले जाएं. उसका कारण यह है कि यह शरीर में तुरंत ऊर्जा भर देता है, साथ ही पेट के लिए भी बेहद मुफीद है. फलों की दुनिया में चीकू का बहुत अधिक व्यावसायिक महत्व नहीं है, क्योंकि इसका भंडारण बेहद पेचीदा है. इसके बावजूद इसे खूब पसंद किया जाता है. मिठास तो कई फलों में होती है, लेकिन इसकी मिठास अनूठी और अलग है. खाते वक्त ऐसा लगता है कि जैसे इसके गूदे में बारीक चीनी के कण भरे हुए हैं. खास बात यह है कि सालों तक इसके पेड़ से निकले रस (दूधिया लेटेक्स) को च्यूइंगम के लिए उपयोग में लाया गया, लेकिन अब च्यूइंगम के अनेक प्रकार मिलने के चलते इसके रस का उपयोग कारखानों (सिंथेटिक रूप) में किया जाता है.

सालों तक इसके पेड़ से निकले रस (दूधिया लेटेक्स) को च्यूंइगम के लिए उपयोग में लाया गया,

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उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगा और फिर दुनिया में फैला

चीकू उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पेड़ है और माना जाता है कि करीब 1000 साल पहले इसकी पैदावार दक्षिणी मैक्सिको, मध्य अमेरिका और कैरिबियन के कुछ हिस्सों में हुई. यह पेड़ पर ही पक जाता है और तोड़कर खाया जा सकता है, इसलिए इसने बहुत नाम कमाया. उसके बाद यह धीरे-धीरे पूरे उष्णकटिबंधीय एशिया में फैल गया. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि विज्ञानी प्रो. रंजीत सिंह व प्रो. एसके सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘Fruits’ में भी चीकू को अमेरिकी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का फल माना है और बताया है कि भारत में इसका प्रवेश 19वीं शताब्दी में हुआ. भारत में कर्नाटक, महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडू इसके सबसे अधिक उपज वाले राज्य हैं. जानकारी बताती है कि चीकू उगाने में भारत पूरे विश्व में आठवें नंबर पर है और यूएई, ओमान, बहरीन, सिंगापुर आदि देशों में इसे एक्सपोर्ट किया जाता है. चीकू से जैम, जेली, स्क्वैश, आइसक्रीम आदि भी खूब बनाई जाती है.

चीकू उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पेड़ है.

इस छोटे से फल में मिनरल्स का भंडार है

चीकू एक शानदार फल है. इसे खाते ही शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने चीकू में पाए जाने वाले मिनरल्स और विटामिन्स की जांच के बाद बताया है कि 100 ग्राम चीकू में ऊर्जा 83 किलो कैलोरी, प्रोटीन 0.44 ग्राम, कुल वसा 1.10 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 19.9 ग्राम, डायटरी फाइबर 10.9 ग्राम, विटामिन सी 14.7 मिलीग्राम, सोडियम 12 मिलीग्राम, पोटैशियम 193 मिलीग्राम, कैल्शियम 21 मिलीग्राम, कॉपर 0.086 मिलीग्राम, आयरन 0.80 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 12 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 12 मिलीग्राम, जिंक 0.10 मिलीग्राम के अलावा अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. इस फल में 71 फीसदी पानी के अलावा 14 प्रतिशत शर्करा (Sugar) होती है. इन्हीं तत्वों के चलते चीकू को शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है.

चीकू एक शानदार फल है और यह खाते ही शरीर में तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है.

शरीर को तुरंत देता है ऊर्जा 

जानी-मानी फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनुसार, चीकू में फ्रुक्टोज और सुक्रोज जैसे सरल सुपाच्य शर्करा पाया जाता है. यह चीनी का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है. इस फल में पाए जाने वाले यौगिक इतने शानदार हैं कि वे शरीर में बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली (Antioxideant) विकसित कर देते हैं. यह शरीर में पैदा होने वाले विषाक्त पदार्थों से भी बेहतर मुकाबला करता है. इसी के चलते चीकू नर्वस सिस्टम को शांत रखता है और मूड को भी पॉजिटिव बनाए रखता है. चीकू में पाए जाने वाले ढेर सारे मिनरल्स हड्डियों को मजबूत करते हैं. जोड़ों के दर्द को कम करते हैं. यह मांसपेशियों को भी स्वस्थ रखता है, इसलिए खिलाड़ियों को इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है.

चीकू ज्यादा खाने से होने वाले नुकसान

इसमें पाए जाने वाला फाइबर आंतों के सिस्टम को सपोर्ट देता है. यह खांसी और बलगम को भी रोक देता है. यह ब्लड प्रेशर को नॉर्मल बनाए रखने में मदद करता है. आंखों की रोशनी को भी सामान्य बनाए रखता है. इसे नियमित और पर्याप्त मात्रा में ही खाना ठीक रहेगा. अगर चीकू को ज्यादा खा लिया तो फाइबर होने के चलते यह कब्ज, दस्त, पेट दर्द और कभी-कभी उल्टी की समस्या पैदा कर सकता है. चूंकि, इसमें शुगर अधिक होती है, इसलिए मधुमेह से ग्रस्त लोगों को इसका कम मात्रा में सेवन करना चाहिए. कच्चा चीकू खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उससे मुंह में खुजली और गले में जलन हो सकती है. इसके बीजों का सेवन करने से भी बचना चाहिए.

Tags: Food, Lifestyle

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