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रोज सोने से पहले बच्चों को जरूर सुनाएं कहानी, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

हाइलाइट्स

रोज कहानी सुनने से बच्चों की कॉन्सन्ट्रेशन पावर बढ़ने लगती है.स्टोरी टेलिंग के जरिए आप बच्चों को संस्कृति से कनेक्ट कर सकते हैं.

Parenting Tips: बचपन में बच्चों को सोते समय कहानियां सुनाने का ट्रेंड सदियों से चला आ रहा है. हालांकि पहले जहां दादी और नानी बच्चों को रात में कहानी सुनाया करती थीं. वहीं आजकल की लाइफ स्टाइल में ये जगह मोबाइल ने ले ली है और कहानी सुनाने (Story telling) का चलन काफी कम हो गया है. क्या आप जानते हैं कि दादी नानी की तरह बच्चों को सोते टाइम कहानी सुनाने के एक नहीं बल्कि कई फायदे मिल सकते हैं.सोने से पहले कहानी सुनाने से बच्चों की पर्सनालिटी डेवेलपमेंट में बेहतर होता है. तो वहीं बच्चों की मेंथल ग्रोथ में भी इससे तेजी आती है. तो आइए जानते हैं बच्चों को कहानी सुनाने के कुछ अनोखे फायदों के बारे में.

नींद आने में सहायक

आमतौर पर सोने से पहले बच्चे फोन या वीडियो गेम्स खेलना पसंद करते हैं. जिसके चलते उन्हें नींद देर से आती है. वहीं नींद पूरी न होने से बच्चों का स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है. ऐसे में सोने से पहले बच्चों को कहानी सुनाना बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे न सिर्फ बच्चे जल्दी सो जाते हैं. बल्कि उन्हें नींद भी काफी गहरी आती है.

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कॉन्सन्ट्रेशन पावर बढ़ेगी

कहानी सुनाते समय बच्चों का सारा ध्यान सिर्फ स्टोरी पर केंद्रित होता है और बच्चे इधर-उधर की चीजों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं. ऐसे में रोज कहानी सुनने से बच्चों की कॉन्सन्ट्रेशन पावर बढ़ने लगती है. साथ ही बच्चों का दिमाग एकाग्र और फोकस रहता है.

इमेजिनेशन स्किल होगी मजबूत

कहानी सुनाते समय बच्चे न सिर्फ कहानियों में खो जाते हैं बल्कि कहानी को इमेजिन भी करने लगते हैं. जिससे बच्चों के अंदर सोचने की क्षमता का विकास होता है और बच्चों की कल्पना शक्ति काफी मजबूत बनती है.

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कहानियों से क्रिएटिव बनेंगे बच्चे

कहानियां सुनाते समय बच्चे स्टोरी के सभी पहलुओं पर गौर करते हैं. साथ ही इन कहानियों से बच्चे काफी कुछ नया भी सीखते हैं. जिसके चलते बच्चों का दिमाग काफी क्रिएटिव होता है. साथ ही स्टोरी टेलिंग के जरिए आप बच्चों को संस्कृति और रिचुअल्स से भी कनेक्ट कर सकते हैं.

बुक्स पढ़ने की हॉबी

सोने से पहले कहानी सुनने से बच्चों का स्टोरीज में इंटरेस्ट डेवेलप होता है. ऐसे में बच्चे मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल कम करके बुक्स पढ़ने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं. साथ ही बड़े होने के साथ-साथ किताबें पढ़ना बच्चों की फेवरेट हॉबी बन जाती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Tags: Child Care, Lifestyle, Parenting, Parenting tips

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