in

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2022: कोई अपना मानने लगा है हार? सुनाएं जीवनीशक्ति बढ़ाने वाली ये कविताएं

World Suicide Prevention Day 2022: 10 सितंबर यानी आज ही के दिन हर साल दुनियाभर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस यानी वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे (World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है. आपको बता दें कि ज्यादातर लोग खुदकुशी जैसा कदम अवसादग्रस्त होकर उठाते हैं. जब कोई उम्मीद या कुछ ठीक होने की आशा नहीं होती तो कई लोगों की जीने की इच्छा खत्म हो जाती है, जो कई मामलों में आत्महत्या का भयावय रूप ले लेती है.

कई लोगों में खुदकुशी की कोशिश करने से पहले कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, जिनकी पहचान कर उन्हें समय रहते बचाया जा सकता है. अगर ऐसे लोगों में जीवनीशक्ति बढ़ा दी जाए तो उन्हें अवसाद की चंगुल से छुड़ाया जा सकता है. ऐसे में आप उन्हें प्रेरणादायक कविताएं भी सुना सकते हैं. कई साहित्यिक रचनाएं इस काम में आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं. हालांकि, इसके अलावा एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें.

जीवनीशक्ति बढ़ाने वाली कविताएं

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है,
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है,
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है,
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में,
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो,
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम,
कुछ किये बिना ही जय-जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
-हरिवंशराय बच्चन

यह भी पढ़ें- पढ़ें, हरिवंश राय बच्चन की चुनिंदा कविताएं

नर हो, न निराश करो मन को

नर हो, न निराश करो मन को
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो,
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को,
नर हो, न निराश करो मन को
संभलो कि सुयोग न जाय चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला,
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना,
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निराश करो मन को,
जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ,
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो,
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को,
निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे,
मरणोत्‍तर गुंजित गान रहे
सब जाय अभी पर मान रहे,
कुछ हो न तज़ो निज साधन को
नर हो, न निराश करो मन को,
प्रभु ने तुमको दान किए
सब वांछित वस्तु विधान किए,
तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो
फिर है यह किसका दोष कहो,
समझो न अलभ्य किसी धन को
नर हो, न निराश करो मन को,
किस गौरव के तुम योग्य नहीं
कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं,
जन हो तुम भी जगदीश्वर के
सब है जिसके अपने घर के,
फिर दुर्लभ क्या उसके जन को

यह भी पढ़ें- पढ़ें, मैथिलीशरण गुप्त की रचना ‘जयद्रथ-वध’ के प्रथम सर्ग का पहला भाग

नर हो, न निराश करो मन को,
करके विधि वाद न खेद करो
निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो,
बनता बस उद्‌यम ही विधि है
मिलती जिससे सुख की निधि है,
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो
-मैथिलीशरण गुप्त (साभार- कविता कोश)

Tags: Hindi Literature, Lifestyle, Poem, World Suicide Prevention day

Source link

ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की ‘विक्रम वेधा’ के ट्रेलर ने यूट्यूब पर मचाई धूम, कर रहा ट्रेंड

कमल हासन की Marudhanayagam के सेट पर आई थीं महारानी एलिजाबेथ II, देखें फिल्म के ग्रैंड लॉन्च की झलकियां