in

सुपर मसाला के साथ जड़ी-बूटी भी है हल्दी, इसके गुण जानकर रह जाएंगे हैरान

हाइलाइट्स

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का धार्मिक महत्व भी काफी है. कुछ देशों में हल्दी का प्राचीन युग से प्रयोग किया जा रहा है.झुर्रियों, मुहांसों को कम कर देता है हल्दी से बा उबटन.

भारतीय धर्म, संस्कृति और खानपान में हल्दी (Turmeric) का विशेष महत्व है. इसे मसाला माना जाता है, लेकिन असल में यह एक जड़ी बूटी है जो शरीर के रोगों के निवारण के लिए उपयोग में आती है. हल्दी को सुपर मसाला भी कहा जा सकता है क्योंकि इसमें शरीर की कोशिकाओं को रोगों से बचाने के गुण और शरीर की सूजन और दर्द को कम करने के गुण हैं. हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं, यानी यह शरीर को रोगाणुओं से बचाती है और घाव या चोट को ठीक कर देती है. हल्दी को ‘भारतीय केसर’ भी माना गया है. भारतीय धर्मग्रंथों में तो हल्दी को गुणकारी माना गया है तो आयुर्वेद में हल्दी को शरीर के लिए ‘वरदान’ माना गया है.

शुद्ध और पवित्र भी है हल्दी

यह सर्वविदित है कि भारत के ऋषि-मुनियों ने उन जड़ी-बूटियों को भोजन में शामिल कर लिया जो बेहतर स्वाद तो पैदा करती ही हैं, साथ ही शरीर को बीमारियों से बचाती हैं. इनमें हल्दी भी शामिल है. इसलिए भारत की हर घर की रसोई की मसालेदानी में हल्दी एक अनिवार्य मसाला है. भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में हल्दी का महत्व औषधि से कहीं अधिक है. हल्दी को शुभ और पवित्र मानता है. पूजा या धार्मिक कार्य में हल्दी आवश्यक है. अथर्ववेद में इसे शरीर के शुद्धिकरण के लिए उपयोगी माना जाता है तो वैदिक युग में सूर्यदेव की पूजा में इसे विशेष माना गया है. विवाह का बंधन हल्दी के बिना अधूरा है तो दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में आज भी दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्दी के एक टुकड़े को बुरी आत्माओं से सुरक्षा के लिए ताबीज के रूप में पहना जाता है.

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का उपयोग धार्मिक कार्यो में भी किया जाता है. (Image-Canva)

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ इसे कफ व वातनाशक मानते हैं

हल्दी के जीवंत पीले प्राकृतिक रंग का उपयोग सदियों से कपड़ों और धागे को रंगने के लिए भी किया जाता रहा है. बौद्ध भिक्षु अपने शरीर को शुद्ध रखने के लिए अपने कपड़ों को हल्दी के रंग से रंगते थे तो दक्षिण भारत के राज्य केरल में ओणम उत्सव के दौरान बच्चों को हल्दी रंग के कपड़े पहनने के लिए दिए जाते थे. भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ तो हल्दी की विशेषताओं से ‘रंगे’ हुए हैं. प्राचीन ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ व ‘सुश्रुतसंहिता’ आदि में हल्दी को चमत्कारिक बताया गया है. इसके अनेक नाम बताए गए हैं और इसे हृदय के लिए हितकर, सुगंधित व कफ-वातनाशक भी कहा गया है. हल्दी को दर्द निवारण के लिए विशेष औषधि भी घोषित किया गया है. इसके साथ दूसरी बूटियों को मिलाकर शरीर को लाभ देने के लिए अनेक औषधियों का भी वर्णन है.

इसे भी पढ़ें: आहार के अलावा मदिरा में भी जौ का होता रहा है उपयोग, सेहत के लिए फायदेमंद इस अनाज का है रोचक इतिहास

भारत में वैदिक काल से उपयोग हो रहा है

हल्दी का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. अमेरिकी शोध संस्थान द मैककॉर्मिक साइंस इंस्टीट्यूट (The McCormick Science Institute) का कहना है कि भारत में हल्दी का उपयोग 4000 साल पहले वैदिक संस्कृति से हो रहा है. उस युग में इसका मसाले के अलावा धार्मिक और औषधीय महत्व भी था. मध्ययुगीन यूरोप में हल्दी को “भारतीय केसर” के रूप में जाना जाता था. तब से हल्दी को केसर के सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है. संस्थान का यह भी कहना है कि 1280 ई. में इतालवी व्यापारी व खोजकर्ता मार्को पोलो, जिसने एशिया की यात्रा की थी, उसने चीन में अपनी यात्रा के नोट्स में हल्दी का उल्लेख किया है कि यह “एक ऐसी सब्जी भी है जिसमें असली केसर के सभी गुण हैं, साथ ही साथ गंध और रंग भी है, फिर भी यह वास्तव में केसर नहीं है.

” विश्वकोष ब्रिटेनिका (Britannica) के अनुसार हल्दी का प्राचीन काल से मसाला, कपड़ा डाई, और चिकित्सकीय रूप से एक सुगंधित उत्तेजक के रूप में उपयोग किया जाता है. दक्षिणी भारत और इंडोनेशिया के मूल निवासी, हल्दी की खेती मुख्य भूमि और हिंद महासागर के द्वीपों में व्यापक रूप से की जाती है. प्राचीन काल में इसका उपयोग इत्र के साथ-साथ मसाले के रूप में भी किया जाता था.

इसे भी पढ़ें: गर्म होती है मूली की तासीर लेकिन शाम में हो जाती है ठंडी, पढ़ें इसका वर्षों पुराना रोचक इतिहास

पश्चिमी दुनिया ने इसके गुणों को देर में जाना

विशेष बात यह है कि कुछ देशों में हल्दी का प्राचीन युग से प्रयोग किया जा रहा है और यह आयुर्वेदिक प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है लेकिन 20वीं शताब्दी तक पश्चिमी दुनिया इसके उपयोग और गुणों से अनजान थी. यूरोप में इसके उपयोग और महत्व को बताते हुए कुछ ही प्रमाण मिले हैं. प्रमाण बताते हैं कि 800 ईस्वी तक हल्दी की खेती और व्यापार चीन और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में फैल गया था. 18वीं शताब्दी तक हल्दी जमैका और अन्य उष्णकटिबंधीय स्थलों में फैल गई. अब पश्चिमी दुनिया में भी हल्दी की लोकप्रियता बढ़ने लगी. आज इसके लाभों की पहचान करने के लिए कई शोध अध्ययन और प्रयोग किए जा रहे हैं.

हल्दी का सेवन शरीर को रोगाणुओं से बचाता है और घाव या चोट को भी ठीक कर देता है. (Image-Canva)

रोगाणुओं से बेहतर बचाव करता है इसका सिस्टम

आयुर्वेद तो हल्दी को जड़ी-बूटी मानता ही है, आधुनिक विज्ञान भी इसे एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidants) और (Anti-Inflammatory) मानता है, यानी हल्दी का सेवन शरीर को रोगाणुओं से बचाता है और घाव या चोट को भी ठीक कर देता है, साथ ही सूजन में भी गुणकारी है. इसे एंटीफंगल (फंगस-रोधी), एंटीबैक्टीरियल (जीवाणु-रोधी) और डिटॉक्सिफायर (विषाक्त-रोधी) भी माना जाता है. मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन व वैद्यराज दीनानाथ उपाध्याय के अनुसार हल्दी प्रकृति का वरदान है जो शरीर और मन को भी ‘शांति’ देता है. इसका रस घावों के उपचार में मदद करता है. त्वचा के लिए भी यह बेहद लाभकारी है. शरीर के दाग-धब्बों तक को मिटा देती है और झुर्रिंयों और मुंहासों तक को रोक देती है. इसका उबटन. इसमें कॉस्मेटिक गुण हैं. इसमें जीवाणुरोधी गुण हैं जो शरीर में संक्रमण को फैलने से रोकते हैं.

भोजन में सीमित मात्रा में हल्दी का नियमित उपयोग किया जाए तो इसके ढ़ेरों लाभ मिलते हैं. (Image-Canva)

ज्यादा उपयोग पेट खराब कर सकता है

हल्दी का उपयोग पेट व दांत दर्द में भी लाभ पहुंचाता है. आयुर्वेद में कोलेस्ट्रॉल व लिवर को सुधारने के लिए हल्दी से जुड़े रसायनों के उपयोग की सलाह दी जाती है. इसका उपयोग गठिया का प्रकोप भी कम कर देता है. यह रक्त को पतला बनाए रखने में कारगर है, जिससे दिल के रोगों का खतरा कम हो जाता है. हल्दी को लेकर लगातार शोध भी चल रहे हैं और माना जा रहा है कि भविष्य में यह कैंसर का इलाज करने में सक्षम हो जाएगी. अगर भोजन में सीमित मात्रा में इसका नियमित उपयोग किया जाए तो इसके लाभ ही लाभ हैं. यह पाचन सिस्टम को सपोर्ट करती है, लेकिन ज्यादा सेवन पेट खराब कर देगा और जलन भी हो सकती है. इसका ज्यादा सेवन पेट में गैस भी पैदा कर सकता है. जो लोग रक्त को पतला करने की दवाई ले रहे हैं, उन्हें हल्दी का सीमित सेवन करना चाहिए.

Tags: Food, Lifestyle

Source link

30 Years of Balwaan: सुनील शेट्टी ने बॉलीवुड में 30 साल किए पूरे, दिव्या भारती के साथ डेब्यू फिल्म में डरे हुए थे अन्ना

SIIMA Awards 2022: अल्लू अर्जुन-बालकृष्ण को मिला बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड, सिम्मा में दिखा ‘पुष्पा’ का जलवा