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स्वाद का सफ़रनामा: खून को साफ और पाचन सिस्टम को दुरुस्त रखती है मोठ दाल, भारत में पैदा होकर पूरी दुनिया में फैली

हाइलाइट्स

इसकी फलियों से तो दाल बन जाती है तो बाकी फसल पशुओं के चारे के काम आती है. अब मोठ दाल की अमेरिका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में खेती की जा रही है.

Swad Ka Safarnama: भारत में शाकाहारियों का प्रतिशत अन्य देशों की अपेक्षाकृत अधिक है. यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है. उसका कारण यह भी माना जाता है कि भारत की जलवायु ने प्राकृतिक तौर पर भोजन के लिए बहुत कुछ दिया है. यहां के फल, सब्जी, अनाज आदि पौष्टिकता को लेकर इतने समृद्ध हैं कि एक बड़ी आबादी कभी भी मांस पर निर्भर नहीं रही. इस कड़ी में भारतीय दालों ने खासा नाम कमाया है. प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर ये दालें शरीर को वह आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराती है, जिसकी उसे जरूरत है. इनमें मोठ दाल भी बेहतर मानी जाती है. यह न सिर्फ खून को साफ करती है, बल्कि पाचन सिस्टम को भी दुरुस्त रखती है. मोठ दाल को अंकुरित कर खाने से उसमें ताकत दोगुना हो जाती है. यह भारत देश की दाल है जो अब अधिकतर दुनिया में खाई जा रही है.

अंकुरित दाल में दोगुने हो जाते हैं पोषक तत्व
मोठ दाल भी अन्य दालों की तरह फलियों (Beans) से निकालकर सुखाई और दाल बनाई जाती है. इस दाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उगाते समय इसके पौधों को अन्य दालों की तरह बहुत अधिक पानी (सिंचाई) की जरूरत नहीं होती. इसकी जड़े इतनी गहरी हो जाती हैं कि यह जमीन के अंदर से ही नमी सोखकर पानी की कमी पूरी कर लेती है. इसकी यही विशेषता इसे अन्य दालों से अलग रखती है. इसकी फलियों से तो दाल बन जाती है तो बाकी फसल पशुओं के चारे के काम आती है. गाय-भैंस आदि इसके पौधों को बड़े चाव से खाती हैं और दूध भी ज्यादा देती हैं. मोठ की अंकुरित दाल तो काफी नाम कमा रही है. इस मोठ दाल को कच्चा भी खाया जा सकता है तो हलका स्टीम्ड कर टमाटर, प्याज की चाट जैसी बनाकर भी मजा लूटा जा सकता है. फूड एक्सपर्ट के अनुसार मोठ की अंकुरित दाल में सामान्य दाल से दोगुणा ताकत हो जाती है.

मोठ दाल विटामिन्स व मिनरल्स से भरपूर है. प्रोटीन तो इसमें खूब है, इसलिए यह शरीर के लिए खासी लाभकारी मानी जाती है.

‘चरकसंहिता’ व ‘सुश्रुतसंहिता’ में है इस दाल की जानकारी

मोठ भी उन्हीं दालों में शामिल है, जो भारत में ही पैदा हुई और उसके बाद पूरी दुनिया में फैलती चली गई. मूंग और उड़द आदि दालों के समान ही इसे ईसा पूर्व से भारत में उगाया जा रहा है. जानी-मानी भारतीय-अमेरिकन वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने मोठ दाल का उत्पत्ति केंद्र सेंटर एशियाटिक सेंटर माना है, इनमें उत्तर-पश्चिम भारत, अफगानिस्तान आदि शामिल हैं. अब मोठ दाल की अमेरिका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य हिस्सों में भी खेती की जा रही है.

इस दाल में पाया जाने वाला जिंक शरीर में एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है,

ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में मोठ दाल का डिटेल में वर्णन है, इसके ‘मकुष्ठक’ कहा गया है. ग्रंथ के अनुसार पकाने पर यह मधुर स्वाद देती है. यह रक्त को साफ करती है और बुखार आदि रोगों में भी उत्तम मानी गई है. इसे रुखी, भारी लेकिन शीतल बताया गया है. इस ग्रंथ के कुछ सौ वर्ष बाद लिखे गए अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘सुश्रुतसंहिता’ में भी मोठ का वर्णन है. इसका अर्थ यही है कि ईसा पूर्व से ही इसे भारत में उगाया व खाया जा रहा है.

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विटामिन्स व मिनरल्स भरपूर हैं मोठ दाल में
मोठ दाल विटामिन्स व मिनरल्स से भरपूर है. प्रोटीन तो इसमें खूब है, इसलिए यह शरीर के लिए खासी लाभकारी मानी जाती है. आधुनिक विज्ञान के अनुसार इस दाल में कैलोरी 343, कार्बोहाइड्रेट 61.5 ग्राम, फैट 1.6 ग्राम, प्रोटीन 22.9 ग्राम, विटामिन बी1 से 6 तक तो है हीं, साथ ही कैल्शियम 150 मिलीग्राम, आयरन 10.8 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 381 मिलीग्राम, मैंगनीज 1.8 मिलीग्राम, फास्फोरस 489 मिलीग्राम, पोटेशियम 1191 मिलीग्राम, सोडियम 30 मिलीग्राम, जिंक 1.9 मिलीग्राम आदि भी पाए जाते हैं.

इस मोठ दाल को कच्चा भी खाया जा सकता है तो हलका स्टीम्ड कर टमाटर, प्याज की चाट जैसी बनाकर भी मजा लूटा जा सकता है.

जाने-माने योगगुरु व आयुर्वेदाचार्य श्री बालकृष्ण के अनुसार मोठ पेट रोग तो लाभकारी है ही, पाइल्स में राहत पहुंचाती है. यह शीतल होती है और कफ-पित्त में लाभकारी है. यह खून साफ करती है और ज्वर को कंट्रोल करती है, साथ ही अफारा (गैस) व मोटापे को भी रोकती है. इसका सेवन कंपवात (Parkison’s) में भी राहत देता है. इसका सूप भी शरीर को लाभ पहुंचाता है. मोठ की दाल को भूनकर और पीसकर उसका उबटन बनाकर त्वचा पर लगाया जाए तो वह निखर जाती है.

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हड्डियों को मजबूत करती है, वायरस से बचाए
इसके अलावा मोठ शरीर के लिए और भी फायदे पहुंचाती है. आहार विशेषज्ञ व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार इस दाल में कैल्शियम भी होता हे, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में भूमिका अदा करता है. यही काम इस दाल में पाए जाने वाला फास्फोरस भी करता है. इस दाल में पोषक तत्वों की कमी नहीं है. यह अवयव शरीर को बैक्टीरिया, फंगस और वायरस से बचाते हैं. इस दाल में पाया जाने वाला जिंक शरीर में एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है, यह तनाव को नियंत्रित करने में मदद करता है.

इसमें प्रोटीन भी भरपूर है, जो मसल्स को मजबूत बनाए रखता है और उनका क्षरण रोकता है. इसमें पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के विटामिन बी शरीर में ऊर्जा का भी संचार करते हैं. इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही करें. ज्यादा खाने से पेट दर्द व ऐंठन की समस्या आ सकती है. कुछ लोगों को शरीर में कैमिकल लोचा के कारण इसके सेवन से एलर्जी भी हो सकती है. वे इस दाल को न खाएं.

Tags: Food, Healthy food, Lifestyle

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