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हर वक्त आती हैं उबकाई कहीं इंटरमिटेंट फास्टिंग तो नहीं है वजह, जानें यहां

हाइलाइट्स

लंबे समय तक शरीर को खाना न मिल पाने के कारण उबकाई आ सकती है. इंटरमिटेंट फास्‍टिंग के दौरान लोग जीरो कैलोरी का सेवन करते हैं. कब्‍ज, दस्‍त, उबकाइयां और पेट में सूजन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं.

Health Tips: पतले होने के एक नुस्‍खे में आजकल जिसका जिक्र आ रहा है वो है, इंटरमिटेंट फास्टिंग. और हो क्‍यों ना, जब दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्‍क ने इंटरमिटेंट फास्टिंग  से 20 पाउंड, यानी 9 किलोग्राम के करीब वजन घटा लिया. इंटरमिटेंट फास्टिंग ने जहां लोगों को फिट रहने के लिए जागरुक किया है वहीं इससे होने वाले साइड इफेक्‍ट्स भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं.  हर वक्‍त उबकाई होना या उल्‍टी जैसा महसूस करना इसके लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग को जिम्‍मेदार माना जा सकता है.

वजन कम करने और फिट रहने के लिए इन दिनों इंटरमिटेंट फास्‍टिंग का चलन काफी बढ़ गया है. इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक पैटर्न है जिसमें 14-16 घंटे फास्‍ट किया जाता है. इससे वजन कम करने में तो यकीनन आसानी होती है लेकिन उल्‍टी, चक्‍कर, आलस और कमजोरी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है.

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लंबे समय तक शरीर को खाना न मिल पाने के कारण उबकाई आ सकती हैं. साथ ही शरीर में जरूरी पोषक तत्‍वों की कमी भी देखने को मिल सकती है. चलिए जानते हैं क्‍यों आती हैं इंटरमिटेंट फास्‍टिंग के दौरान उबकाई.

क्‍यों आती हैं उबकाई 
इंटरमिटेंट फास्‍टिंग एक ऐसा शब्‍द है जिसका उपयोग लोग खाने के एक पैटर्न के रूप में करते हैं, जिसमें नियमित रूप से फास्‍ट रखा जाता है. हेल्थलाइन के अनुसार इंटरमिटेंट फास्‍टिंग के दौरान लोग बहुत कम खाते हैं या जीरो कैलोरी का सेवन करते हैं. इंटरमिटेंट फास्‍टिंग के दौरान सिरदर्द रहना और उबकाई आना सामान्‍य है लेकिन लगातार इस समस्‍या का सामना करना किसी बड़ी समस्‍या को बढ़ा सकता है. हालांकि आमतौर पर उबकाई फास्टिंग प्रोटोकॉल के शुरुआती दिनों में ही आती हैं लेकिन जिन लोगों की बॉडी इस फास्‍टिंग पैटर्न को एक्‍सेप्‍ट नहीं करती है उन्‍हें लंबे समय तक इसका सामना करना पड़ता है. खाली पेट से होने वाली गैस के कारण उबकाई अधिक आती हैं.

बढ़ जाती है डाइजेस्टिव प्रॉब्लम
इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान कई तरह की डाइजेस्टिव प्रॉब्‍लम बढ़ जाती हैं. कब्‍ज, दस्‍त, उबकाइयां और पेट में सूजन जैसी समस्‍याएं आमतौर पर लोगों को परेशान कर सकती हैं. पोषक तत्‍वों की कमी के कारण ये डाइजेस्टिव प्रॉब्‍लम बढ़ जाती हैं. इंटरमिटेंट फास्‍टिंग के दौरान हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है. साथ ही डाइट में फाइबर रिच फूड को एड किया जाना चाहिए. इससे पेट अधिक देर त‍क भरा रहेगा और उबकाइयां कम आएंगी. 

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चक्‍कर और लो एनर्जी
इंटरमिटेंट फास्टिंग का प्रयोग करने वाले लोगों को थकान और लो एनर्जी का सामना करना पड़ सकता है. इंटरमिटेंट फास्टिंग में लो ब्लड शुगर के कारण थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है. इसके साथ ही फास्टिंग से कुछ लोगों को अपर्याप्‍त नींद का भी सामना करना पड़ता है जिस वजह से थकान, चक्‍कर  और उबकाई आ सकती हैं. 

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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