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Bhojpuri: ‘खइके पान बनारस वाला’ फेम गीतकार अंजान पकिया भोजपुरिया रहलें, लिखलें झमकउआ गीत

13 सितम्बर के उनके पुण्यतिथि ह, असहीं इयाद आ गइलें ह अंजान. दिल-दिमाग से भोजपुरिया लालजी पांडे उर्फ अंजान इहवें बनारस में पैदा भइल रहले. हालांकि दुनिया छोड़े के बेरा मायानगरी में रहलें. बाकिर कहावत बा, काशी वासी भले चल जाव, ओकरा अंदर से काशी कबो ना निकलेला. भगवान के अजबे खेला बा, लोग काशी मुए आवेला, अंजान काशी से बंबई ए खातिर अइलें ताकि जी सकस. का बा उनके कहानी आगे जानल जाई.

अंजान के भोजपुरी कनेक्शन
अंजान अपना गीतन से अइसन पहचान बनवले कि उ हिन्दी गीत-संगीत प्रेमी खातिर कबो अंजान ना रहलें. बाकिर उ भोजपुरियो में आपन चुहलबाजी वाला गीतन से श्रोता के खूब मन मोहलें. हालांकि उ जीवन दर्शन के गीत भी लिखलें अउरी प्यार के रस में डूबल रोमांटिक गीत भी. भोजपुरी फिल्म बलम परदेसिया (1979) से भोजपुरिया पर्दा पर ऊ गर्दा उड़ावल शुरू कइलें. एकरा बाद त उ एक से बढ़ के एक बढ़िया गीत भोजपुरी में लिखलें जवन यादगार बन गइल. ‘गोरकी पतरकी रे, मारे गुलेलवा जियरा उड़-उड़ जाये’ के भुला सकेला. आशा भोंसले के बलखात आवाज आ मोहम्मद रफी के छेड़छाड़ से भरल गायकी के मिश्रण जब अंजान के लिखल बोल पर भइल त एगो मधुर गीत के सोआद सभके कान चिखलस.

अंजान भोजपुरी में नगदे गीत लिखलें. उ भोजपुरी में गीत संगीतकार चित्रगुप्त खातिर लिखलें आ दुनू जाना के दोस्ती बाद में उनके लइका लोग के बीच निभल. अंजान के बेटा समीर अंजान आ चित्रगुप्त के बेटा आनंद अउरी मिलिंद के तिकड़ी बाद के साल में एक से एक हिट गाना देहले बा. अंजान के हिट भोजपुरी फिल्मन में बलम परदेसिया के अलावा हमार भौजी, बिरहिन जनम-जनम के, भईया हमार राम जइसन भउजी हमरी सीता आदि बा. फ़िल्मी मनोरंजन गीत में भी चेतना जगावे के काम अंजान करत रहलें. बलम परदेसिया में उनकर गीत बा – जगत रहs भईया तू सोये मति जइहs, पसीना के कमइया, मुफत जिन गँवइहा.

बेमारी उनके काशी से मायानगरी खींच ले आइल
अंजान के पूरा नाम लालजी पांडे ह. बनारस के ओदार गांव में शिवनाथ पांडे के घरे उनके जनम भइल. उनके माई के नाम इंदिरा देवी रहे. 28 अक्टूबर 1930 के जनमल अंजान के शुरुए से कवितई, गीत-संगीत, साहित्य अउरी कला में रुचि रहे. देखीं, बनारस में असहीं हर दुसरा घर में झाल, ढोलक, तबला, हारमोनियम के आवाज सुने के रउआ मिलिये जाई. जदी केहू पेशेवर गायकी ना करत होई त का, भजन कीर्तन भा शौकिया गायकी के बहाने संगीत प्रेम देखइबे करेला. त बुझ लीं कि अंजान के बनारस में अइसन परिवेश मिलल जवन उनका अंदर संगीत झंकृत कर देलस. अंजान के परिवार के आर्थिक स्थिति बहुत अच्छा ना रहे बाकिर उ जइसे-तइसे जोड़ गेंठ के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से वाणिज्य में पोस्टग्रेजुएशन कर लिहलें. पढ़े-लिखे के सौखीन रहबे कइलें. पढ़ाई के दौरान गीत, शाइरी के चलते दोस्त-इयारन में काफी चर्चित रहलें. अइसन भी कहल जाला कि उनके इयारे उनकर तखल्लुस ‘अंजान’ दिहलें. अंजान के जवानिए में अस्थमा जइसन असाध बेमारी धर लेहले रहे. अब उनके पूरा जीवन एह के लेके जीए के रहे.

उनके एगो संघतिया शशि बाबू बनारस के डी पेरिस होटल के मालिक रहलें, एक दिन ऊ जिद कर के अंजान के अपना एक जान-पहचान वाला के होटल द क्लार्क में होत एगो संगीत कार्यक्रम में ले गइलें. एह प्रोग्राम में मशहूर गायक मुकेश आइल रहलें. शशि बाबू मुकेश से अंजान के मिलववलें. जब मुकेश उनके गीत आ शाइरी सुनलें त वाह-वाह करे लगलें. मुकेश अंजान के सलाह देहलें कि रउआ त बंबई आवे के चाहीं. हालांकि तब अंजान एह बात पर विशेष धेयान ना देहलें. उनके बुझाइल कि बंबई के खर्चा कइसे झेलाई, जब इहवें के खर्चा नइखे आंटत. बाकिर किस्मत में त कुछु औरिये लिखाइल रहे. उनके अस्थमा के बेमारी अउरी बिगड़त गइल. डाक्टर इहाँ ले कहि देहलस कि रउआ अगर जिए के बा त बनारस छोड़ दीं. इहाँ के शुष्क हवा राउर स्थिति साफ बिगाड़ दी. रउआ समुद्री किनारा वाला शहर में जाईं, उहाँ के हवा रउआ के सूट करी. अब अंजान के लागल कि साइत बंबई गइल ठीक रही, उहाँ के नमी वाला हवा भी सेहत खातिर अच्छा रही अउरी मुकेश जी के बातो परतिया लिहल जाई.

रुपिया पइसा त रहे ना, जइसे तइसे संघर्ष के कुछ दिन कटल आ फेर उनके हालत खराब हो गइल. उनके बेटा एगो साक्षात्कार में बतवले रहलें कि उनके बाबूजी कई साल तक कबो ट्रेन में, कबो प्लेटफ़ॉर्म पर, कबो अपार्टमेंट के सीढ़ी पर आपन समय कटले रहलें. उ गुजारा करे खातिर बंबई में ट्यूशन पढ़ावे लगलें. ओही बीचे उ मुकेश से मिललें जे उनके बंबई आवे के सलाह देहले रहलें. मुकेश उनके प्रेमनाथ से मिलववलें. प्रेमनाथ तब प्रिजनर ऑफ गोलकोंडा बनावत रहलें. एह में उनके गाना लिखे के मिलल. उनके पहिला हिन्दी गीत ‘लहर ये डोले, कोयल बोले’ एह फिल्म में आइल. एह फिल्म में एगो अउरी गाना उ लिखलें. गीत से उनके करियर के कवनो रफ्तार ना मिलल बाकिर छोट-छोट फिल्मन में गीत लिखे के मौका मिले लागल. एह तरे रोटी के जोगाड़ हो गइल.

1963 के फिलिम से गोदान में उनके मौका मिलल, राजकुमार के एह फिलिम के संगीत रवि शंकर देहले रहलें. उ एह फिल्म के लिखल गीतन से इंडस्ट्री में आपन धमक दे देहलें. एकरा चलते उनके तबके बड़ संगीतकार ओ.पी. नैय्यर संपर्क कइलें अउरी बड़ फिल्मन में गीत लिखे के मौका दिहलें. फिल्म बंधन के गीत ‘बिन बदरा बिजुरिया कइसे चमके’ अंजान के पहिला सफल गीत रहे. एही समय कल्याण जी-आनंद जी से भी अंजान के नजदीकी भइल आ फेर शुरू भइल अंजान के हिट गीतन के सिलसिला. तब अमिताभ बच्चन खातिर अंजान एक से बढ़के एक हिट गीत लिखल शुरू कइलें अउरी फिल्म इंडस्ट्री के बहुते बड़ गीतकार बन गइलें. प्रकाश मेहरा के साथे भी अंजान के खूब चलल आ उ मेहरा के अक्सर फिल्मन में गीत लिखलें. अमिताभ खातिर कल्याण जी-आनंद जी के साथे अंजान के गीतन के लिखे के सिलसिला शुरू भइल 1976 के फिल्म दो अजनबी से. ओकरा बाद हेरा फेरी के ‘बरसों पुराना ये याराना’, खून पसीना के टाइटल सॉन्ग, मुकद्दर का सिकंदर के ‘रोते हुए आते हैं सब’, ‘दिल तो है दिल’, ‘ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना’, लावारिस के ‘कब के बिछड़े’ आ आपन सबसे हिट गीत ‘खइके पान बनारस वाला’ डॉन खातिर उ लिखलें. अंजान अमिताभ बच्चन खातिर दोसर संगीतकारन के साथे भी मिलके गीत लिखलें. साइत गंगा किनारे वाला रिश्ता दुनू जाना खूब निभावल लोग. बनारस के अंजान आ प्रयाग के अमिताभ के जोड़ी खूब जमल.

अंजान के लीगेसी के उनके बेटा समीर अंजान आगे बढ़ा रहल बाड़ें. समीर 90 के दशक में एक से बढ़के एक हिट गीत लिखलन. समीर के लिखल आशिकी फिल्म के कई गीत त अभियो लोगन के जुबान पर बा. अंजान अपना गीतन के मार्फत हमेशा संगीत प्रेमियन के दिल के तार झनझनावत रहिहें. उनके गीत संगीत में योगदान खातिर हार्दिक श्रद्धांजलि!

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं.)

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