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Bhojpuri: निरहुआ के बेहतरीन 10 गो फैमिली ड्रामा जवन निरहुआ के निरहुआ बनवलस

एगो बेरा रहे जब निरहुआ भोजपुरी फिल्म जगत में सफलता के शिखर पर रहलें. तब उनके हर साल औसतन 5-7 गो फिल्म रिलीज होखे. ऊ तब टटका-टटका निरहुआ रिक्शावाला से अचानके दर्शक के चहेता बनल रहलें. साधारण चेहरा मोहरा वाला एगो गँवई जवान जब सिनेमा के पर्दा पर गुंडन के मुंडन कइलस आ अपना प्यार के पावे खातिर विधायक से लड़ गइल त ई भोजपुरिया दर्शक के एगो करिश्मा जइसन लागल. जनता के बुझाइल कि ओही लोग के बीच के कवनो साधन विहीन परिवार के लइका उठके हेतना बड़ कारनामा कर देले बा. ऊपर से ओह फिल्म के सगरी गाना सुपरहिट. हमरा इयाद बा, तब निरहुआ रिक्शावाला के लेके अइसन माहौल बनल रहे कि जदी पुछला पर रउआ बताईं कि हम ई फिल्म नइखी देखले, त लोग रउआ के गुनहगार समझे. ठीक ओइसे, जइसे एह साल केजीएफ 2 के साथे भइल ह. केजीएफ 2 के जइसन बवाल तब निरहुआ रिक्शावाला के साथे मचल रहे. यूपी-बिहार के कई गो सिनेमाघर में त ई फिल्म एक डेढ़ बरिस ले चलते रहि गइल. आईं निरहुआ के दस गो बेहतरीन फैमिली ड्रामा फिल्मन के बारे में जानल जाव.

निरहुआ रिक्शावाला (2007)
ई फिल्म हिन्दी के ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जइसन साबित भइल रहे. ए में जे भी कलाकार रहे, सबके करिअर सेट हो गइल. फिल्म में अन्डरडॉग स्टोरी रहे कि कइसे एगो साधारण रेक्सावाला विधायक के बहिन के सुरक्षित घर छोड़त बा अउरी ओही बीच दुनू लोग में प्रेम हो जात बा. फेर विधायक भाई एह प्रेम के दुश्मन बन जात बा, कारण कि समाज का कही? फिल्म में ओह रेक्सावाला के अपना परिवार, समाज से मधुर संबंध, कॉमेडी आ गीत-संगीत के खूब बढ़िया मिश्रण रहे, जवन फिल्म के अविश्वसनीय कामयाबी दिअवलस.

परिवार (2008)
ई फिल्म में निरहुआ के डबल रोल रहे, जे में उ बड़ भाई किशन आ छोट भाई मोहन दुनू के रोल कइले बाड़ें. एह में किशन के दू गो छोट भाई बाड़ें. फिल्म के कहानी बा कि कइसे बड़ भाई किशन अपना छोट भाइयन खातिर अपना जवानी के प्यार (रानी चटर्जी) के कुर्बानी दे देत बा, जेकरा चलते ओकर लइकी के घर वाला दुश्मन बन जात बाड़ें. ओहि दरम्यान ओकर जिगरी दोस्त दुर्गा जवन घोर गरीबी से जूझ रहल बा, किशन से मदद मांगे आवत बा. किशन आपन गाढ़ल कमाई दोस्त के दे देत बा. बदले में दुनू दोस्त में ई सहमति होत बा कि जब मोहन अउरी दुर्गा के बेटी रानी बड़ होइहें त दुनू के बियाह होई. बाद में अमीर हो गइल दुर्गा, अइसन करे से मना कर देत बा. ओकरा बाद के कहानी बहुत दिलचस्प बनल बा. बड़ा ही भावुक फिल्म बनल बा, परिवार. कइसे परिवार के मुखिया घर के खुशी खातिर उ सब भी करेला जवन ओकरा सोच, मान-मर्यादा के खिलाफ बा, ई देखावल बा एह फिल्म में. निरहुआ के अभिनय साँचो सराहनीय बा. असलम शेख भोजपुरी के एगो संजीदा निर्देशक रहलें, उनके गइला के बाद ई कमी केहू ना भर पावल, का जाने केहू भरियो पाई कि ना.

प्रतिज्ञा (2008)
ई फिल्म भोजपुरी के बेहतरीन फिल्मन में से मानल जाला. सुशील कुमार उपाध्याय के निर्देशन में बनल ई फिल्म में निरहुआ के अलावा पवन सिंह भी बाड़ें. पवन सिंह तब नया-नया फिल्मन में आइल रहलें. ई फिल्म के गीत, पटकथा अउरी निर्देशन तीनु बढ़िया बा, एही कारण ई फिल्म खूब चलल. ठाकुर हरीनाम सिंह के परिवार के इर्द गिर्द बुनल ई फिल्म लोग के अभियो पसंद आवेला.

निरहुआ चलल ससुराल (2011)
गाँव के निरहुआ सबके चहेता बा. गाँव में तेंदुआ के आतंक बढ़ल बा, एही से उ सब ओकरा के मारे खातिर रात में पहरा देत बाड़ें. तबले ओकनी के एगो अंजान लइकी थकल पियासल हालत में मिलत बिया जेकरा के घरे लिआवत बाड़ें. सुनैना नाम के ई लइकी आपन सब कुछ खो देले बिया. जब लइकी निरहुआ के घरे रहे लागत बिया त ओकरा निरहुआ से प्यार हो जात बा. बाद में, जब लइकी अपना परिवार से मिल जात बिया त ओकर परिवार वाला निरहुआ से बियाह करे के तइयार नइखन होत. एही से एगो टकराहट पैदा होता. आगे के कहानी एकरे इर्द गिर्द घूमत बा. ई फिल्म बड़ा सुंदर बा अउरी देखे वाला बा.

बिदेसिया (2012)
ई फिल्म भिखारी ठाकुर के ‘बिदेसिया’ नाटक पर आधारित रहे अउरी ओकर आधुनिक रूपांतरण रहे. फिल्म नैरेशन शैली में बनल रहे, ई भोजपुरी खातिर अलग प्रयोग रहे. निरहुआ के अदाकारी एह फिल्म में काफी सराहनीय रहे, लेकिन भिखारी के कथा में छेड़-छाड़ आ अति प्रयोग से फिल्म के ऊ सफलता ना मिलल.

औलाद (2014)
असलम शेख के ही निर्देशन में बनल फिल्म रहे, औलाद. एह फिल्म में निरहुआ के ऑपोजिट पाखी हेगड़े बाड़ी. फिल्म में उनके भाई के भूमिका असल जीवन के भाई प्रवेश लाल यादव निभवले बाड़े. फिल्म के कहानी माई बेटा के संबंध अउरी गाँव में ठेकेदारी में होखे वाला प्रपंच के इर्द गिर्द बुनल गइल बा. ई फिल्म काफी मनोरंजक भी बा अउरी काफी सफल भी भइल रहे.

निरहुआ हिन्दुस्तानी (2014)
निरहुआ अउरी आम्रपाली दुबे के हिट जोड़ी के ई पहिला फिल्म ह. एह फिल्म में निरहुआ के किरदार मुंबई आपन बियाह करे खातिर लइकी खोजे आवत बा अउरी इहाँ एगो हत्या के केस में गलती से फंस जात बा. हालांकि निर्दोष साबित भइला के बाद उ बहुत वाइरल होत बा आ एगो लइकी नाम के चक्कर में ओकरा से झूठ मूठ के बियाह कर लेतिया. लेकिन बाद में ओकरा ना चाहते हुए भी शादी निभावे के पड़त बा, निरहुआ के गांवे आके. ई फिल्म कॉमेडी आ ईमोशन से भरल बा.

राजा बाबू (2015)
गाँव के एगो जवान लइका राजा के सभे ताना मारत बा कि उ कुछ ना कर पाई. हालांकि ओकर बड़ा मन बा कौन बनेगा करोड़पति में जीत के करोड़पति बने के. ओकरा किस्मत से मौका मिल जात बा अउरी उ बंबई जाके जीत भी जाता, बाकिर ओकरा बाद शुरू होता ओकरा साथे खेला. इहे बा फिल्म के कहानी. कहानी जब नायक के परिवार के इर्द गिर्द आवत बा तब बहुत मजेदार हो जाता. ई फिल्म रोचक बा अउरी देखे लायक बा.

निरहुआ हिन्दुस्तानी 2 (2017)
अपना बियाह खातिर बेकल निरहुआ पर गाँव के लोग दांव लगावत रहत बा कि ओकर बियाह कबो ना होई. बाकिर समय के खेला अइसन कि ओकर दू गो बियाह हो जात बा, एगो गाँव वाली लइकी से अउरी एगो शहर वाली से. फेर दू गो मेहरारू के फेरा में निरहुआ अइसन पड़त बा कि का कहल जाव. सिचूएशनल कॉमेडी वाला ई फिल्म अंत में भावुक कर देत बा. ई फिल्म निरहुआ के सुंदर पारिवारिक फिल्मन में से एक बा.

आए हम बाराती बारात लेके (2022)
निरहुआ के ई फिल्म के कहानी में ए बेरी पंजाब के झलक भी लउकल बा. जसविंदर कौर एह में उनके ऑपोजिट अभिनेत्री बाड़ी. अवधेश मिश्रा उनके दोस्त लेखां पिता के भूमिका में बाड़ें अउरी संजय पाण्डेय लइकी के पिता के भूमिका में बाड़ें. फिल्म में निरहुआ आ अन्य कुछ कलाकार के अभिनय देखे लायक बा. ई फिल्म कुछ दिन पहिले डिजिटल पर रिलीज भइल बा, जवना के अबले दू करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुकल बा.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं.)

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