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Bhojpuri में पढ़ें: घाटे-घाटे छठ, तिले-तिले गीत

गीत के एतना प्रोडक्शन त अउर कबो ना होला. त छठी मइया के भाषा गद्य ना पद्य ह. पद्य में भी लोकगीत…लोकभाषा में…बिहार के भाषा में, भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका आ बज्जिका में. बा नू ? त ई कन्फर्म हो गइल कि छठी मइया बिहारी हई…बिहार के हई…लोक के हई…एह से छठ पूजा लोकपर्व ह…लोक के आस्था के महापर्व ह. एही से ऊ लोकभाषा में बतियावेली. गा-गा के बतियावेली. काहे कि लोक के बोले में भी एगो लय होला, लहरा होला, राग होला आ भाषा सरल-सहज होला, सोझ होला. लपिटाह ना होला, क्लिष्ट ना होला, संस्कृतनिष्ट ना होला.

जब संस्कृतनिष्ट ना होला त एह पूजा में पंडीजी लो के कवनो जरुरत ना होला. अरघ कवनो छोट लइको दे देला. बाकी कूल्हि मंतर त मेहरारु खुदे गीत गा-गा के पढ़ देली सन. जइसन कि पहिलहीं बतवनी हँ, कि छठी मइया संस्कृत वाला क्लिष्ट मंतरवा से बेसी भोजपुरी वाला भक्ति गितवा पसंद करेली काहे कि ऊ आम आदमी के देवी हई. लोक के देवी हई. ई लोक के पूजा हs. ऊ लोक के भाषा बुझेली. एही से उनका इहाँ अमीरी-गरीबी के भेद नइखे. जात-पाँत के भेद नइखे. सभे एक्के घाट प एक्के साथे बइठ जाला. सस्ता पूजा बा. पंडीजी के फीस त देवे के नइखे. कवनो महंग फल-फूल के दरकार नइखे. अनाज आ सीजनल फल से काम चल जाला.

बाकी देवता लो के लड्डू-पेड़ा चढ़ेला आ छठी मइया के?….दूघ, फल, घीव, ऊंख, गागल नींबू, काँच हरदी, अमरख, आँवला, सुथनी, सिंघाड़ा…इहे सब नू चढ़ेला जी ?

बाकी देवी-देवता लो घर में पूजाला, भा मंदिर में आ छठी मइया? नदी, पोखरा, झील, बीच, आइसलैंड, पैडलिंग पूल, स्वीमिंग पुल आ कहीं-कहीं त बाथटब में भी.

केतना एडजस्टेबल आ एक्सेप्टेबल बाड़ी छठी मइया. एक्सेप्टेबल त एतना कि ग्लोबल हो गइल बाड़ी. आरा से अमेरिका पहुँच गइल बाड़ी. बरवा तर के पोखरवा से सिलिकॉन वैली के क्वेरी झील पहुँच गइल बाड़ी. बाकी अंगरेज नइखी भइल. अपना मूल स्वरुप में बाड़ी. अमेरिको में घाट प रउरा ठेकुआ, नरियर, केरा, सूप, कलसूप, डलिया, दउरी-दउरा, दिया-दियरी, सेनुर-पियरी अइसे लउकी जइसे अमेरिका में बिहार समाइल बा….आ सुरुज भगवान त सबकर एक्के बाड़े कतहीं अरघ दीं. धरती नू बँटाइल बाड़ी, आदमी बँटाइल बा, ब्रम्हांड त एक्के बा, परमात्मा एक्के बाड़न. ..छठियो मइया इहे बतावेली…बड़का-छोटका, अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच के भेद मिटा के सबका के एक्के घाट बरोबरी प बइठावेली आ कहेली कि रे कथी बँटाइल बा, काहे खातिर लड़त बाड़न स. लेकिन लोग त गावे में बा, गाना के मरम बूझे में थोड़हीं बा? छठी मइया किहाँ त डूबत आ उगत सूरूज के भी भेद ना होला. दूनू पुजालें. एह बात के मरम बूझल आ ओकरा के जिनगी में उतारले छठ पूजा ह. देवता लोग दुख के थोड़े मार दी लोग. हाँ, दुख सहे आ झेले भा सुख-दुख में समभाव रहे के ताकत जरुरे दे दीही लोग. दुख ख़तम होखे वाला रहित त देवता लोग प दुख कइसे आइत?

देवता लोग से इयाद पड़ल कि देवी-देवता पर बहुत फिलिम बनल बा. ऊ फिलिमे ह कि संतोषी मइया घरे-घरे पहुँच गइली. संतोषी मइया फिल्म से घरे-घरे पहुँचली बाकिर छठी मइया घरे-घरे आ लोक में व्याप्त होके फिल्म में पहुंचल बाड़ी.

छठ पर फिल्म
फिल्म ‘बिटिया छठी माई के’ साल 2019 के खूबसूरत फिल्म बा. यश कुमार एह में लीड रोल में बाड़ें. बाकी रोल में अंजना सिंह, ब्रजेश त्रिपाठी, श्यामली श्रीवास्तव, अनूप अरोरा, प्रीति सिंह, उधारी बाबू, राधे मिश्र, अमित शुक्ल, वर्षा तिवारी आदि बा लोग. फिल्म के निर्माता दीपक शाह बाड़ें अउरी कहानी खुद यश कुमार अउर एसके चौहान के लिखले बाड़ें. भोजपुरी फिल्म ‘बिटिया छठी माई के’ सामाजिक विषय पर बनल फिल्म बा. एमें एगो मानसिक रूप से असंतुलित आदमी अपना भाभी से बोलsता, जे छठी माई के पूजा करsतारी कि ‘एगो औरत, एगो देवी के पूजा करतारी अउरी मांगsतारी बेटा. का विडम्बना बा कि उ स्त्री, एगो स्त्री के पूजा करके एगो स्त्री नइखे मांगत.

पूर्वी भारत अउरी पूरा बिहार में अइसन मान्यता बा कि छठी मईया से अगर पुत्र के कामना करीं त पुत्र-रत्न के प्राप्ति होला. भोजपुरी फिल्म खातिर ई नया विषय बा अउरी समाज में एह बात के लेके जागरुकता जरूरी बा कि हरबार स्त्रीए बाँझ ना होली, कई बार पुरुष में भी कमी हो सकेला. उहो बांझ हो सकेले. एह जरुरी बिंदू के एह फिल्म मे उठावल गइल बा. फिल्म में यश कुमार एगो विक्षिप्त व्यक्ति के भूमिका निभवले बाड़ें. यश के किरदार छठी मैया में काफी आस्था रखsता अउरी एक दिन जब उ छठी माता से एगो बेटी के कामना करsता त ओके मंदिर में एगो लावारिस नवजात बच्ची मिल जातिया, उ पागल बच्ची के पालता अउरी ओके सफल बनावता आ ओकरा खातिर सबसे लोहा लेबे खातिर तैयार रहsता.

एही साल 2019 में हीं छठी मईया पर हिंदी में भी एगो फिल्म आइल जवना के जिक्र इहाँ जरूरी बा काहें से कि भोजपुरी में एह विषय पर नगदे फिल्म बनल लेकिन एतना विस्तार से चर्चा अउरी छठ माता के प्राचीन इतिहास के तह में जाके शोध कर के देखावे वाला फिल्म ना बनल. निर्देशक मुरारी सिन्हा के एह प्रयास के खूब प्रशंसा भइल. रविकिशन आ प्रीति झिंगयानी एह फिल्म मे मुख्य भूमिका मे बा लोग.

एह बारे में निर्देशक मुरारी सिन्हा के कहनाम बा कि ‘’ चूँकि छठ में गैर बिहारी लोगों की भी आस्था बढ़ी है और भारत के दुसरे राज्यों या दूसरे देशों के लोग भी इससे जुड़ते जा रहे हैं तो फिल्म के माध्यम से उन्हें छठ का रहस्य समझाना जरुरी है. ‘’

आशीर्वाद छठी मइया के नाम के फिल्म बनल. एकर भाग-2 भी बनल जवना के निर्माता भोजपुरी फिल्म के स्थापित पीआरओ उदय भगत बाड़न. उदय जी बतवलन ह कि ‘’ एह फिल्म में छठी मइया के महिमा से बेसी उनकर परिचय आ इतिहास पर फोकस बा.’’

सात समुन्दर पार छठ
हम घाट-घाट के छठ देखले बानी काहे कि हम घाट-घाट के पानी पीयले बानी. वर्ष 2003 में पहिला बेर पूर्वी अफ्रीका गइनी. युगांडा के राजधानी कंपाला में रहत रहीं. इंजिनियर रहनी उहां लेकिन कला, साहित्य आ संस्कृति के भूख के वजह से 2005 में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ़ युगांडा (बीएयू) के स्थापना कइनी. दीवाली त धूमधाम से मनावते रहे लोग उहाँ. छठ व्रत अपना-अपना घर में करत रहे या इक्का-दुक्का लोग साथ में करत रहे. धीरे-धीरे कई स्थान पर सामूहिकता में करे लागल. उहाँ आजो भारतीयन के घर में अफ्रिकी लड़की लोग बहुतायत में काम करेला. धीरे-धीरे छठ घाट पर उहो लोग शामिल होखे लागल. छठ गीतन पर झूमे लागल.

अब त युगांडा के कई गो दोस्त तंजानिया, नाइजीरिया आ केन्या में भी चल गइल बा लोग. दरभंगा के मनोज चौधरी जे तब युगांडा में रहत रहलें, फेर तंजानिया गइलें आ आजकल वेस्ट अफ्रीका के बेवरेज कंपनी में कंसल्टैंट बाड़न, बतावेलें कि आजकल तंजानिया के Mwezi beach पर आ नाइजीरिया के लोगोस के बनाना आइसलैंड पर लोग छठ मनावत बा.

2006 में हम युनाइटेड किंगडम चल गइनी आ उहां पर भी भोजपुरी समाज, लन्दन के स्थापना कइनी. तब हम उहाँ सुदूर गांव लिटिल हादम में मिनरल वाटर के एगो कंपनी में प्लांट मैनेजर रहनी. गाँव में त छठ ना होत रहे बाकिर यूके के दूनू बड़ शहर लन्दन आ बर्मिंघम में छठ होत रहे आ आजकल त अउर सामूहिक रूप में होखे लागल बा. बिहारी कनेक्ट लन्दन के चेयरपर्सन उदेश्वर सिंह बतावेनी कि लन्दन में उहाँ के पूरा टीम छठव्रतियन के सहयोग करेला.

गीतांजलि मल्टीलिंगुअल लिट्रेरी सर्किल, बर्मिंघम के जनरल सेक्रेटरी, कवि आ पेशा से चिकित्सक डॉ० कृष्ण कन्हैया अपना पत्नी डॉ० अंजना अउर दू पुत्र (अक्षत आ उन्नत) के साथ 25 बरिस से बर्मिंघम यूके में रहत बानी. उहाँ के बतवनी कि इहाँ भारतीय लोग सभ परब ओही तत्परता आ उल्लास से मनावेला जइसे कि भारत में. डॉ० अंजना बतावेनी कि “नहाय-खाय, खरना आ छठ पूजन खातिर सामग्री बनावे के काम हमनी के अपना गैरेज़ के अंदर करेनी जा आ शाम-सुबह के अरघ अपना घर के पीछे पैडलिंग पूल में साफ पानी भरके गंगाजल छिड़क के करेनी जा. यूके में तालाब, झील चाहे नदी में अइसन करे के अनुमति नइखे. पूजा के सब चीज हमनी के इहाँ सोहोरोड हैन्सवर्थ बर्मिंघम सिटी में मिल जाला. शुरू-शुरू में सूप, डलिया के व्यवस्था भारत से करत रहनी जा पर अब इ सब इहवें उपलब्ध हो जाला. ठेकुआ बनावे के साँचा भारत से ले आइल रहनी जा. दूघ, फल, घी, इहाँ तक कि ऊंख आ गागल नींबू, कच्चा हरदी, अमरख, आँवला भी इहाँ उपलब्ध बा. ई पर्व हमनी के मिलजुल के मनावेनी जा आ दोस्त, रिश्तेदार आ पड़ोसी सभे शामिल होला. कुछ लोग ग़ैर भारतीय मूल के भी शामिल होला. चारो दिन लगभग 30-40 लोग के भीड़ होला. आनंद आवेला. “

अमेरिका के बिजनेस वुमेन आ सोशल एक्टिविस्ट संध्या सिंह पटना बोरिंग कैनाल रोड के आनन्दपुरी के रहे वाली हईं. हालाँकि मूलरूप से त उहाँ के आरा के रहनिहार हईं. गत 40 साल से अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में बानी. पीछला साल ह्यूस्टन में ‘हाउडी, मोदी’ सम्मेलन खातिर ‘टेक्सास इंडिया फोरम’ के आयोजन समिति के ओर से भारतवंशियन के आमंत्रित करे आ कार्यक्रम के सफल बनावे में योगदान देवे खातिर उहाँ के सराहल गइल. छठ पूजा में भी अइसहीं व्रतियन के सहयोग करेनी संध्या सिंह. उहाँ के बतावेनी कि इहाँ छठ समुन्द्र आ खाड़ी के किनारे, नदियन के पास चाहे कहीं-कहीं स्विमिंग पूल में भी जाके होला. ह्यूस्टन काक्लीयर लेक (गैल्विस्टनबे) पॉपुलर स्पॉट बा छठ खातिर. पहिले त लोग इण्डिया से हीं सूप-दउरी लेके आवत रहे लेकिन अब अपना बाजार नामक दूकान में मैक्सिको से इंडियन सामन आ जाता. अब ऊँख, दउरी, सुथनी, सिंघाड़ा आ सूप खातिर भटके के नइखे पड़त.

अमेरिका के भोजपुरी गायिका स्वस्ति पाण्डेय, जे अपना पति तरुण कैलाश के साथ उहां छठ भी करेनी, स्वयं गीत संगीत के कमान सम्भालेनी आ सभ व्रती लोग के साथे घाट पर खाँटी छठ गीत गाके पूरा माहौल छठमय बना देनी, बतावेनी कि“ अमेरिका के सिलिकॉन वैली (कैलिफ़ॉर्न्या) में हमनी के क्वेरी झील के सुरम्य घाट पर, छठ पूजा के ओही श्रद्धा आ पवित्रता से मनावेनी जा, जइसे हज़ारो मील दूर मातृभूमि भारत में होला. उहाँ के कहेनी कि जब भी केहू जान-पहचान वाला भारत जाला, त सूप मँगवा लेनी जा. वज़न में हल्का होखे के कारण भारत से आवे वाला एक-एक व्यक्ति, छठ के नाम पर श्रद्धापूर्वक कई गो सूप ले आवेला आ व्रतियन में बाँट देला. अब त इहाँ के भारतीय स्टोर्स भी एह डिमांड के ध्यान में रखके, छठ के समय विशेष ऑर्डर पर भारत से सूप मँगवा देत बाड़न. जहाँ तक दउरा के बात बा, त उ ज़रूरत इहाँ के बेंत के बनल बासकेट्स से पूरा हो जाता.

भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मॉरिशस के चेयरपर्सन डॉ० सरिता बुद्धू बतावेनी कि छठ त गिरमिटिया देशन मॉरिशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम में भी धूम-धाम से मनावल जाला.

इ त विदेश के बात भइल. भारत में भी दिल्ली आ मुंबई दू गो शहर में हम खुदे बंटल बानी. छठ के समय दूनू जगह एगो बिहार दिखाई देला आ सरकार खुद पहल करेला घाट खातिर आ छठ के तरह-तरह के इंतजामात खातिर. एह में छठ माई के कृपा कम, बिहार के प्रभाव ज्यादा दिखाई देला. वोट बैंक के असर ज्यादा नज़र आवेला. बात आस्था आ श्रद्धा के भी बा. गैर बिहारी भी एह व्रत के अपनावे लागल बाड़न संतान प्राप्ति खातिर, पति के सलामती खातिर आ तरक्की खातिर.

अंत में हम अमरीका में रहे वाली अमेरिकी गायिका क्रिस्टीन के जिक्र जरूर कइल चाहब जे बिल्कुल भोजपुरिया अंदाज में छठ गीत गाके चकित करेली. सचमुच छठ के लोकप्रियता अइसन बा कि विदेशो में, विदेशी लोग भी अब एकरा में दिलचस्पी लेवे लागल बा.

छठ के गीत
छठ गीतन के त बाढ़ हर साल अइबे करेला, पहिले यूट्यूब सबसे बड़ स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म रहे त ओ पर आवे. अब कई गो आउरो प्लेटफ़ॉर्म जुड़ गइल बाटे, जइसे गाना, हंगामा प्ले, स्पॉटीफ़ाई, जिओसावन, आईट्यून आदि. रउआ एह मुख्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देखब त छठ के फिल्मी वर्जन भा एल्बम शैली के गीत खूब मिली, बोझा के बोझा मिली. कुछ नया तर्ज पर पुरान माल परोसल होई, कुछ पुरान धुन पर नया बोल. कहीं नया अलंकार अउरी दृश्य गढ़ाइल होई त कहीं पुरनके के हेर फेर कइल गइल होई. हर साल इहे खेल होला. बाकिर एह सब में अधिकता बा सुने में भौंडा संगीत अउरी बेतुका शब्दन के भरमार वाला गीत. फिर भी कुछ गीतन के रूप परिवर्तन पर बात कइल जाई कि कइसे पहिले के गीतन से आज के गीतन में अंतर आइल आ का फरक पड़ल; ह्रास भइल कि विकास.

शुरुआत पारंपरिक गीतन से कइल जाव. छठ गीत के पर्याय अउरी प्रमुख गीत ह, ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए’. दुसर गीत जवन गाँव में मेहरारू – लइकी गावेली, उ ह, ‘केरवा जे फरेला घवद से, ओ पर सुगा मेंड़राय, उ जे खबरी जनइबो आदित्य के, सुगा दिहें जूठीआए’. ‘उगा ना सुरुज देव, भइल अरघिया के बेर’. ‘सेविले चरन तोहार, हे छठी मईया, महिमा तोहार अपार, हे छठी मईया’. ई सब सबसे ढेर गावल जाए वाला गीत बाटे, जवन सदियन से अपना एही रूप में गवात आ रहल बा. हो सकेला कि एकाध शब्दन के हेर फेर भइल होखे, बाकिर ई पारंपरिक गीत लगभग ओहि लेखां बा. ई गीतन के लिखल के भा सबसे पहिले गावल के, पता ना. बाकिर केहू त पहिले गवले होई, कढ़वले होई. फेर कालांतर में धीरे धीरे ओ में नया बोल अउरी नया अंतरा जुड़त गइल होई. ई भी हो सकेला कि ई कई लोगन के सामूहिक प्रयास होई जवन आगे भी अइसहीं समूह में गावत गावत आपन रूप बदलले होई.

एकरा बाद जब एल्बम गीतन के दौर चालू भइल त फेर उहाँ से ओमें बिजनेस के खेल घूस गइल, हिट गीत बनावे के फंडा आ गइल, आ अर्थ के अनर्थ करे के अभ्यास चालू हो गइल. बहुत लोग छठ गीतन के हिट फिल्मी गीतन के तर्ज पर बनावल, बहुते लोग वायरल अश्लील गीतन के पैरोडी बनावल आ हेतना पवित्र आ लोक आस्था से जुड़ल गीतन के भद पीट दिहल. बाकिर सभे खराबे ना बनावल, कुछ लोग अच्छा गीत लिखल आ ओके नीमन से गवावल भी. जवन खराब बनल बा उ छठ पूजा के रेफरेंस लेके भाई-भौजाई, देवर-साली आ छठ घाट पर कइल छुछूनरई भा माई से ऊलजलूल मनौती के केंद्र में लेके गीत लिखल आ गावल, फिल्मावल गइल बा. अफसोस कि ई गीतन पर व्यूज भी ज्यादा बा ई वायरल भी ज्यादा भइल बाटे. जवन गीत अच्छा प्रतिमान अउरी छठ पूजा के आत्मा के जीवित रखत गीत लिखाइल बाड़ी सन अउरी बनल बाड़ी सन, ओहके लोग सुनले भी कम बा आ फइलवले भी कम बा. साँच कहीं त कई बार हमरा भोजपुरिया श्रोता पर ही कोफ्त होला, दिन भर अश्लील आ खराब गुणवत्ता के गीतन के रोना रोए वाला ई लोग बढ़िया गीतन के सराहेला काहें ना.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri, Chhath Puja

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