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Chirawa saag rota: सरसों का साग तो सब खाते हैं, क्या कभी चिड़ावा का साग-रोटा खाया है?

रिपोर्ट- इम्तियाज अली

झुंझुनूं: बदलते मौसम के साथ खान पान का जायका भी बदलता है. सर्दी का मौसम शुरू होते ही देशभर में प्रसिद्ध चिड़ावा का साग रोटा भी तैयार होना शुरू हो जाता है. चिड़ावा के पेड़ों के बाद यदि किसी जायके ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है, तो वह है यहां का साग रोटा.

इस जायके का हर कोई मुरीद है. जैसे ही दीपावली आती है, इसके साथ ही चिड़ावा में जगह-जगह साग रोटा तैयार होने लगता है. इस सीजन में यहां पर जगह-जगह दुकानें सजने लगती हैं. करीब 4 महीने लगने वाली यह दुकानें अपने अनूठे स्वाद के कारण करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए का व्यवसाय करती हैं.

करोड़ों का है कारोबार
यहां का साग-रोटा भी देशभर में खूब चाव से खाया जाता है. इस लजीज डिश की बड़े-बड़े शहरों में भी डिमांड है. यही वजह है कि महज चार माह के सीजन में पूरे जिले में करीब तीन करोड़ से ज्यादा का कारोबार हो जाता है. इस व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बताया कि साग-रोटा का सीजन सर्दी यानी नवंबर से फरवरी तक चलता है. अधिकांश दुकानों में सप्ताह के बुधवार, शुक्रवार और रविवार को साग-रोटा तैयार किया जाता है. कुछ दुकानों पर प्रतिदिन भी तैयार होता है.

चार दशक पहले हुई थी शुरुआत
इस व्यवसाय से जुड़े लोग बताते हैं कि साग-रोटा करीब चार दशक से ज्यादा समय पहले चलन में आया था. पहले यह एक दो दुकानों पर ही बनता था. लेकिन अब इसकी दुकानें बढ़ गई. चिड़ावा के अलावा झुंझुनूं सहित कई कस्बों में ये बनाया जाने लगा है. विवाह शादियों में भी चिड़ावा से कारीगर बुलाकर बनवाते हैं. इसके साथ ही यह जायका अब घर-घर में भी दस्तक दे चुका है. देशी घी से बना होने के कारण सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. दुकानों पर साग-रोटा की फुल डाइट के 500 और हाफ डाइट के 250 रुपए लिए जाते हैं.

ऐसे बनता है साग
फूलगोभी और मटर का प्याज-लहसुन के तड़के से बनने वाला साग (सब्जी) ही साग कहलता है. दूध-घी के मोयन लगे बेसन की रोटियों को रोटा कहते हैं. दोनों काे मिलाकर साग रोटा कहते हैं. चिड़ावा के साग रोटा बनाने वाले कारीगर विक्की हर्षवाल के अनुसार, साग बनाने के लिए शुद्ध घी और फूलगोभी व मटर की जरूरत पड़ती है. घी को गर्म करने के बाद उसमें खड़ा मसाला डाला जाता है. इसमें जीरा, दालचीनी, जायफल, लौंग, सौंफ व कस्तूरी मैथी डाली जाती है. वैसे तो साग-रोटा बनाने का तरीका बहुत पुराना है लेकिन पिछले 10 से 12 सालों में इसने व्यावसायिक रूप ले लिया है. झुंझुनूं जिले के लगभग सभी दुकानों, होटल्स, ढाबों आदि में सर्दी के मौसम में साग- रोटा ही मिलता है.

Tags: Rajasthan news, Rajasthan news in hindi

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