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Delhi-NCR Air Pollution: अस्थमा अटैक आने पर क्या होनी चाहिए फर्स्ट ऐड? डॉक्टर से जानें जरूरी टिप्स

हाइलाइट्स

अस्थमा अटैक से बचने के लिए हर तीन महीने बाद लंग्स फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए.अस्थमा अटैक जैसी कंडीशन के लिए डॉक्टर से इमरजेंसी दवाएं जरूर लेनी चाहिए.

Delhi Air Pollution & Asthma Attack First Aid: पिछले कुछ सप्ताह से राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के शहरों की एयर क्वालिटी (AQI) बेहद गंभीर स्तर पर है. हवा प्रदूषित होने से लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और अस्थमा अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए कई लोग दिल्ली से दूर साफ हवा वाली जगहों पर भी जा रहे हैं, ताकि परेशानी से बचा जा सके. अस्थमा और सांस की बीमारियों के मरीजों के लिए एयर पॉल्यूशन बेहद खतरनाक साबित हो रहा है. साफ हवा न मिलने से अस्थमा अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अस्थमा अटैक जानलेवा हो सकता है. ऐसे में लोगों को इसके लक्षण पहचानकर तुरंत फर्स्ट ऐड देनी चाहिए. इसके बाद जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. अब सवाल उठता है कि अस्थमा अटैक की कंडीशन में फर्स्ट ऐड क्या होती है? इस बारे में पल्मोनोलॉजिस्ट से जरूरी बातें जान लेते हैं.

क्या पॉल्यूशन से बढ़ रहे अस्थमा अटैक के मामले?
नई दिल्ली के मूलचंद हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री के मुताबिक एयर पॉल्यूशन, मौसम में बदलाव और अलर्जेंस समेत कई चीजें अस्थमा को ट्रिगर कर सकती हैं. पॉल्यूशन की वजह से अस्थमा के मरीजों को परेशानियां हो रही हैं और अस्थमा अटैक के मामले बढ़ गए हैं. पॉल्यूशन बढ़ने के बाद सांस लेने में दिक्कत, गले में परेशानी, तेज खांसी, जुकाम, सीने में तनाव जैसे केस सबसे ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. अस्थमा या अन्य रेस्पिरेटरी डिजीज से जूझ रहे लोगों को पॉल्यूशन से सबसे ज्यादा खतरा होता है. पॉल्यूशन से लंग्स को काफी नुकसान होता है और लंबे समय तक पॉल्यूशन में रहने से लंग्स कैंसर, गले का कैंसर व अन्य कैंसर का खतरा भी बढ़ता है.

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जानें Asthma Attack अटैक के लक्षण
– सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत
– सीने में टाइटनेस फील होना
– सांस लेने के दौरान आवाज आना
– बोलने में अत्यधिक दिक्कत
– चलने में ज्यादा परेशानी

Asthma Attack आने पर क्या हो फर्स्ट ऐड?
डॉ. भगवान मंत्री कहते हैं कि ज्यादातर लोग अस्थमा अटैक और कार्डियक अरेस्ट को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं. सबसे पहले यह समझना चाहिए कि यह किस तरह का अटैक है. अस्थमा के अटैक में ब्रीदिंग प्रॉब्लम बहुत ज्यादा होती है. जो लोग अस्थमा की समस्या से पहले से जूझ रहे हैं, वे लक्षण के आधार पर इसकी पहचान कर सकते हैं. अस्थमा अटैक होने पर सबसे पहले इनहेलर या नेबुलाइजर के जरिए दवा लेनी चाहिए. इस दौरान अगर लक्षण ज्यादा हैं, तो इनहेलर की डोज ज्यादा भी ले सकते हैं. अस्थमा अटैक आने पर सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और सांस लेना मुश्किल हो जाता है. इसके लिए डॉक्टर कुछ इमरजेंसी दवाएं देते हैं, जिनका इस्तेमाल करना चाहिए. फर्स्ट ऐड के बाद जल्द से जल्द पल्मोनोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए.

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किन लोगों को अस्थमा अटैक का खतरा ज्यादा?
पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार अस्थमा के मरीजों को हर 3 महीने के अंदर पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए. इस टेस्ट में लंग्स की कैपेसिटी देखी जाती है. जिन मरीजों की लंग्स कैपेसिटी कम होती है, उन्हें अस्थमा अटैक का खतरा ज्यादा होता है. अस्थमा अटैक से बचने के लिए वैक्सीन भी लगवा सकते हैं. हर साल डॉक्टर मरीज की कंडीशन को देखकर यह वैक्सीन लगाते हैं. जो लोग स्वस्थ हैं, उन्हें भी पॉल्यूशन की वजह से ब्रीदिंग अटैक या एक्यूट वायरल सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. ऐसे लोगों को परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर दवा लेनी चाहिए.

Air Pollution के खतरनाक असर से कैसे करें बचाव?
– घर से बाहर कम से कम निकलना चाहिए
– घर के दरवाजे और खिड़की बंद रखें
– मास्क लगाकर ही बाहर जाना चाहिए
– अस्थमा के मरीज समय पर दवाएं लें
– हेल्दी खाना खाएं और खूब पानी पीएं
– घर में एयर प्यूरिफायर लगा सकते हैं

Tags: Air pollution, Delhi-NCR Pollution, Health, Lifestyle

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