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    Corona से मुकाबले के लिए बनाएं तन-मन को मजबूत, ऐसे करें Kapalbhati

    पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन के जरिए केंद्र सरकार देशवासियों को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाना चाहती है। सरकारी स्तर पर यह सार्स कोरोना वायरस-2 से बचने का सराहनीय कदम है। लेकिन सरकार की यह योजना तभी कारगर साबित हो सकती है, जब इस वायरस से बचने का प्रयास हम सभी अपने-अपने स्तर पर करें। आइए जानते हैं कि फेफड़ों को और हमारे श्वांस तंत्र को कमजोर करनेवाले वायरस कोरोना से बचने के लिए Kapalbhati प्राणायाम के जरिए कैसे अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए…

    कपाल का अर्थ होता है खोपड़ी और भाति यानी हल्का करना। अर्थात सांसों के जरिए अपने दिमाग और शरीर को हल्का करना। कपालभाति के दौरान श्वास प्रक्रिया को इस प्रकार नियंत्रित किया जाता है कि शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है। इससे हमारी बॉडी का स्ट्रैस रिलीज होता है और हम लाइट फील करते हैं।

    बॉडी प्यूरिफिकेशन
    कपालभांति की प्रक्रिया के दौरान हमारी बॉडी का प्यूरिफिकेशन होता है और शरीर के टॉक्सिन या वेस्ट मैटर रिलीज हो जाते हैं। इससे हमारा शरीर जीवंतता आती है और हम पहले की तुलना में अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं।

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    इन बीमारियों को दूर करे
    कपालभाति हमारे फेफड़ों की सफाई और इन्हें मजबूत बनाने का काम करता है। इस कारण हम कई सांस संबंधी कई बीमारियों और एलर्जी से बचे रह सकते हैं। क्योंकि कोरोना वायरस भी हमारे श्वशन तंत्र पर अटैक करता है, ऐसे में कपालभाति हमारे फेफड़ों और श्वसन तंत्र की वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

    सांस अंदर लेते वक्त पेट बाहर करें और सांस छोड़ते वक्त पेट अंदर खींचें

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