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Weight loss tips: सिर्फ हाई कैलोरी ही नहीं, इन 5 तरह से तनाव भी मोटापा को बढ़ाता है

हाइलाइट्स

इंडोर में रहना, आर्टिफिशियल लाइटें, शहरी जीवन,रात में स्क्रीन टाइम जैसे आधुनिक सुख सुविधाओं ने लोगों में क्रोनिक तनाव को बढ़ा दिया है. हाई कॉर्टिसोल शरीर में खनिज तत्वों को कम कर देता है. इससे मैग्नीशियम, पोटैशियम की कमी होने लगती है

Stress can increase obesity risk: मोटापा दुनिया की बहुत बड़ी समस्या है. पिछले 30 सालों में मोटे लोगों की संख्या 3 गुना बढ़ी है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2016 में ही मोटापा से पीड़ित वयस्कों की संख्या 1.9 अरब पहुंच गई थी. आजकल तो अधिकांश बच्चों का भी वजन बढ़ा हुआ है. 2020 के आंकड़ों के मुताबिक 5 साल से कम उम्र के 3.9 करोड़ बच्चे भी ज्यादा वजन के शिकार हैं. लेकिन आमतौर पर हम सोचते हैं कि ज्यादा कैलोरी वाले फूड लेने से मोटापा होता है. विशेषज्ञों की मानें तो यह एक कारण हो सकता है लेकिन क्रोनिक स्ट्रेस यानी लंबे समय से चले आ रहे तनाव भी मोटापा का बहुत बड़ा कारण है. इसलिए यदि आपके मोटापे की वजह टेंशन है तो इसे दूर करने के बारे में सोचिए. चाहे मोटापा किसी कारण बढ़ा हो, जब तक आप क्रोनिक तनाव को दूर नहीं करेंगे, तब तक वजन नहीं घटेगा.

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क्यों होता है क्रोनिक स्ट्रेस
एचटी की खबर के मुताबिक मेटाबोलिक हेल्थ एक्सपर्ट केट विलियम कहती हैं कि गतिहीन जीवनशैली जैसे कि हमेशा इंडोर में रहना, आर्टिफिशियल लाइटें, शहरी जीवन,रात में स्क्रीन टाइम जैसे आधुनिक सुख सुविधाओं ने लोगों में क्रोनिक तनाव को बढ़ा दिया है. तनाव के कारण व्यापक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इस स्थिति में लोग इंसुलिन की संवेदनशीलता खो देते हैं जिसके कारण कार्बोहाइड्रैट का मेटाबोलिज्म हो नहीं पाता है और वजन बढ़ जाता है.

इस तरह तनाव बढ़ाता है मोटापा

क्रोनिक स्ट्रेस कॉर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है. कोर्टिसोल एंटी डाययूरेटिक हार्मोन (एडीएच) को बढ़ाता है, जिसके कारण फ्लूड रिटेंशन और पफीनेस का जोखिम बढ़ जाता है.

जब शरीर में कॉर्टिसोल की मात्रा बढ़ जाए तो थायराइड का फंक्शन गड़बड़ा जाता है. इससे मेटाबोलिज्म और डाइजेशन धीमा हो जाता है और अंततः मोटापा बढ़ने लगता है चाहे आप ज्यादा भोजन करें या न करें.

हाई कॉर्टिसोल शरीर में खनिज तत्वों को कम कर देता है. इससे मैग्नीशियम, पोटैशियम की कमी होने लगती है जो ब्लड शुगर को मैंटेन करने के लिए जरूरी है. इसके बिना शरीर इंसुलिन का प्रतिरोध करने लगता है और शरीर में फैट जमा होने लगता है.

कॉर्टिसोल शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को बढ़ा देता है. जब ब्लड शुगर बढ़ता है और इसका अवशोषण नहीं होता है तो अतिरिक्त शुगर फैट में बदल जाता है. यानी वजन बढ़ने लगता है.

कॉर्टिसोल प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन को दबा देता है जिसके कारण एस्ट्रोजन हार्मोन प्रभावशाली होने लगता है. एस्ट्रोजन हार्मोन फैट को स्टोरेज में मदद करता है.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle, Obesity

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